भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 1040

और अधीनता करता है कि, ऐ परमात्मा ! हे दीनदयाल ! मुझे इस नरकसे उद्धार कर । मैं सच्चे अन्तःकरणसे तेरी भक्ति करूंगा । तेरी भक्तिके तुल्य कुछ न जानूंगा । देखो पाटनके राजा जगजीवनकी कथामें लिखा है कि, राजाने कबीर साहबसे पूछा कि, इस संसारमें आपके आनेका क्या कारण है ? उसके उत्तरमें कबीर साहबने कहा कि —

भूलेहु कोल गंभंका बाँधी । अब चकचौंधी आई आँधी ॥

सबहि जीव कौल करि आये । बाहर निकसत सबहि भुलाये ॥

सतगुरु जोव चितावन आये । यहि कारण संसार सिधाये ॥

परमात्मा उस समय उसके समक्ष खड़ा दृष्टि आता है । ऐसे दुःख और विपत्तिमें परमेश्वरके अतिरिक्त उसका कोई भी सहायक नहीं होता । वही जठराग्निके सब दुःखोंसे रक्षा करता है उसके जीवनको अभय करता है । उसके पोषणके लिये नाभिमें एक छिद्र बनाता है उसमें एक नली लगाता है, जिससे उसके पेटमें अन्न पहुँचकर उसकी रक्षा होती है । उसके हाथ, पांव बंधे होते हैं, गन्दगीमें लपटा रहता है, कुछ भी करने योग्य नहीं होता । माता जो कुछ खाती पीती है, उसीके एक भागसे बालकका भी पोषण होता है । जब जन्म होनेका दिन निकट आता है तो माताके स्तनोंमें दूध पहिले भर जाता है । जिस समय बच्चा गर्भसे बाहर होता है उस समय उसकी नाभिका द्वार बन्द हो जाता है, उसके स्थानमें स्तनोंमें छिद्र हो जाता है, जिससे बच्चा दूध पीता है । परमात्मा उसकी सेवा के लिये दो सेवक उपस्थित करता है, जो इस संसारमें माता पिताके नामसे प्रसिद्ध होते हैं दोनों बच्चेसे ऐसा प्रेम करते हैं कि, सदा उसके लिये अपने प्राण निछावर कर देनेके लिये तैयार रहते हैं । जब तक बच्चा युवा नहीं हो जाता, जबतक अपनेको संभालने योग्य नहीं हो जाता, तबतक उसकी रक्षा किया करते हैं । जिस साहबने नाभीमें नल लगाकर स्तनोंमें दूध देकर, दो प्यारे सेवक द्वारा रक्षा की । फिर संसारके सब सुखोंको प्रदान किया सब कठिनाइयोंको सहज कर दिया ऐसे सच्चे पिताको भूलकर उससे विरोधताको खड़ा हुआ प्राणी माता पिताकी क्या प्रतिष्ठा कर सकेगा ? जब मूलही नहीं तो शाखा, पत्र, फल, फूल की तो बात कहाँ है ।

६ खून मत करो — इस आज्ञासे यहूदी और ईसाई लोग केवल “मनुष्य-काही रक्त न बहाना” यह आशय समझते हैं, पर कबीर साहबने कहा है कि, पशु, मनुष्य सबका रक्त बराबर है. दोनोंकाही बदला देना होगा । पशु और मनुष्य सब जीवधारी परस्पर भाई हैं । विशेषकर यह विषय इसी पुस्तकमें पशुओंके ज्ञान