कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 1208, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंफरऊन हुआ ढूंन बर्मै सदर नशीं । दरियामें डूबा साधुकी तौहीन किया ॥
वेद और कुतुब ख्वानी मगरूर डूबे । जो सब उलमा साधुकी तौहीन किया ॥
गुरुपीर बतदवीर पनः उनकी जो छोड़ा। धर्मराज धरा साधुकी तौहीन किया ॥
बद फेली खजना हुये पर कुफ हो दिल । तारिक मरा साधुकी तौहीन किया ॥
सबयमकी खोराक ऐसे आदम आजिज । न कोई बचा साधुकी तौहीन किया ॥
ग्रन्थल
सर बसर सूली तर बदारे हमल । मअसियतके लिये करारे हमल ॥
वे गुणाहोंको कैंद कौन करे । आसियोंको हुआ मदारे हमल ॥
हमल दोजखमें जो हुआ महबूस । गन्धको गन्धकी नआर हमल ॥
केते हैं गन्दिगीके जो कीड़े । उनको ही बूदो काश प्यारे हमल ॥
होवे क्योकर पसन्द आदमको । यह जहन्मकी आमो गार हमल ॥
मुजरिमोंके लिये बना यह मकौ । बन्द हैं दर अजाबो नार हमल ॥
जब पड़ा कैंदमें पुकारे तू । दर्द दुख इन्द्र बेशुमारे हमल ॥
तोबः २ कर बसत मिन्नत । कीजिये गुफा र रुस्तगारे हमल ॥
अब न हरगिज भुलाऊं तेरा नाम । रख पनाह मुझको अज शरारे हमल ॥
सब गुनहगार बे गुनह न कोई । जिसका हैं सीत रोजगारे हमल ॥
वे गनाहान हैं सूरत अस्ल बसूल । गुनह आलूद हैं शिकारे हमल ॥
जहां जावे वहां मुक़दर हो । पुर है सब गर्द और गुबारे हमल ॥
एकसे छूट दूसरे हो बन्द । नहिं पायान हैं शब निहारे हमल ॥
जब मिहरबां हुये करीमे रहीम । कर दिया दूर भारी प्यारे हमल ॥
आया बाहर सो कौलको भूला । याद आवे न अपना यारे हमल ॥
फस मया पनियवी मोहब्बतमें । कौन पूछे वह गमगुसारे हमल ॥
जन्म साबिकका यह कसूर आजिज । पा उत्तर सर तल न चारे हमल ॥
ग़ज़ल—बैठे खुद जाय मैं जाकर दिल दीवाना मेरा ।
हुब्ब महबूब लगा कर दिल दिवाना मेरा ॥
काल चक्करसे बचैगा भी तदबीर है एक ।
मुरशिद पनः आकर दिल दीवाना मेरा ॥
सतगुरु कदमें खाक कोहल नूरसे देख ।
आँखोंमें सजा कर दिल दीवाना मेरा ॥
होवेगा अमर फेर मरेगा न कभी ।
उसकीही उलशको खाकर दिल दीवाना मेरा ॥