भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished1,367 पृष्ठ

पृष्ठ 1294, कुल 1367 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1294

दिया जाये तो अति उत्तम हो, बहुत पदार्थोंका दान दिया जाता है, वे चीजें—हाथी, घोड़ा, गाय, बैल, सोना, चांदी, वस्त्र, अनाज और कन्या पुस्तक आदि हैं। यदि दान गुप्त दिया जाये तो अति उत्तम हो। अपनी शक्ति और योग्यके अनुसार दान देना चाहिये। दानका पद बड़ा पुण्यमय है। दान पात्रको दान दिया हुआ उत्तम फल दायक है। जैसे सुपच सुदर्शनजीके पाँच कौल खानेहीसे महाराजा युधिष्ठिरका यज्ञ पूरा हो गया। यदि कोई ऐसा विचार करता रहे कि, सुपच सुदर्शनजी जैसा कोई साधु मिलेगा, तो दान देंगे, यह उसकी भूल है। इस प्रकार उदारता न करके तर्क वितर्क उठानेसे मनुष्य कृपण होकर दान जैसे उत्तम कर्मसे वंचित रहकर पापका भागी होता है। जो कृपणताके वश हुआ वह महानीच पापी होता है।

उससे उचित है कि, शूरवीर, धर्मबन्धु, सुकृत, विरक्त, दीन दास, दासी, विद्यार्थी, ऋणी आदि सब प्रकारके मनुष्य अथवा कोई भी जिसको जिस पदार्थकी आवश्यकता हो उसे दान दे। क्योंकि वही दानका अधिकारी है। मनुष्यको उचित है कि—

जो काहूके होय उपकारी । मन वच कर्म करि लेई विचारी ॥

पशुआ होयसो आँख छिपावे । मानुष बुद्धि सपने नहीं पावे ॥

दरिद्रतामें पड़े हुये किसी प्रतिष्ठित आदमीको, अपने धर्ममें आने वालेको चाहिये कि, अपने बालबच्चों, परिवार और सम्बन्धी, पड़ोसी और अतिथि आदि सब प्रकारके पुरुषोंकी सहायता कामना बिना करे। दुःखी पथिक अर्थात् अपने देशसे दूर देशमें किसी प्रकारसे दुःखी पड़े हुये मनुष्योंकी सहायता सब प्रकारसे करे। इसी प्रकार आवश्यकतानुसार बहुत प्रकारके दान हैं देशकालको विचारकर अवश्य इस अमूल्य पुण्यका संचय करे।

दान देनेकी रीति ।

१ दान देनेमें जहाँतक हो शीघ्रता करना चाहिये।

२ किसी पुण्य तिथिपर अथवा जब दान देना हो गुप्तदान दे। क्योंकिक गुप्तदानका फल अनन्त है।


—होकर दिया जाता है। अनुत्तम दान वह है जो कि, मान अथवा व्याप्तिके लिये अथवा किसी दूसरे दाताको जीतनेको बदलेकी आशा रखकर दिया जाय। दान केवल धन मात्रसेही नहीं होता वरन् विद्या दान, निर्भयता दान, मान दान आदि अनेक प्रकारके दान हैं जिन्हें निर्धन भी कर सकते हैं। यदि दानके विशेष विवरण देखने हों तो स्मृति ग्रन्थोंको देखो तथा उच्च कोटिके साहित्य देखो।