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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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विद्या तथा धनके अभिमानियोंको विचार करना चाहिये, कि, जब उनके अभिमानके मूल विद्या तथा धनादि दूसरीही अवस्थामें नष्ट होजाते हैं तो तीसरी और चतुर्थ अवस्थामें क्या गति होगी।

जैसे जाग्रत् अवस्थाका अहंकार असत्य है वैसेही स्वप्नावस्थाकी भी सब सामग्री मिथ्या हैं। इसी प्रकार सब अवस्थाओंके पदार्थ व अभिमान मिथ्या और मृगतृष्णाके जलके समान दुःखदायी हैं। इन्हीं पाँचोंके अभिमान में सारे अभिमानी बढ़ हैं। इनसे बाहर जानेका मार्ग किसीको प्राप्त नहीं होता।

इन पाँचों शरीरोंके परे छठा शरीर हंस देह है जिसमें प्राप्त होकर अहंकार नष्ट हो जाता है, जीव अपने यथार्थ स्वरूपकोप्राप्त हो जाता है। जिनको उपरोक्त पाँचों शरीर और उनकी अवस्थाकी यथार्थ सुधि नहीं वे कैसे ईश्वरको पासकेंगे। संतलोग इनको भली प्रकार जानते हैं। उसको अपने वशमें करके उनके ऊपर शासन करते हैं। जो इनकी विशेष सुधि नहीं रखता वह उनके बन्धनमें पड़ा हुआ दुःखी होता है।

हंस देहकी प्राप्तिके उपाय।

११५ प्रश्न—क्या उपाय करें कि, हंस देह शीघ्र प्राप्त हो?

उत्तर—हंस देहकी प्राप्तिके लिये सच्चे सत्यगुरुसे सच्चा प्रेम होना चाहिये। चूम्बक जिस प्रकार लोहेको अपनी ओर आकर्षण कर लेता है उसी प्रकार प्रेम शीघ्रही प्रियासे मिला देता है। सत्य प्रेमके विना प्रियाका मिलना असम्भव है।

सत्य प्रेमीके दश चिह्न—१ नेत्रका औसूसे डबडबाये रहना — २ नीदका न आना। ३ ठण्डी ठण्डी स्वांस लेना। ४ पीतरङ्ग। ५ देहकी कृशता। ६ धीमी बोली। ७ अल्प आहार। ८ ओठोंका सूखा रहना। ९ ध्यानावस्थित। १० प्रियकी प्रशंसा करना और लिखना।

उपरोक्त दश चिन्होंसे प्रेमी पहँचाना जाता है। कबीर साहबके प्रेममें राजा अमरसिंह रोते २ मृत्युके निकट पहुँच गये थे। पीछे सत्गुरुने दर्शन देकर कहा कि, हे राजन् ! अभी तुम्हारी शतवर्ष आयु शेष है इसको भोगलो तब लोक चलना। राजाने न माना कहा कि, मुझे कुछ न चाहिये मैं आपके संगही जाऊँगा तब कबीरसाहबने उसे लोकको पहुँचा दिया।

ऐसेही धर्मदास साहबको सत्गुरुके प्रेममें छः महीना रोते बीत गये। तब सत्गुरु मिले कृतार्थ करके अंतर्धान होगये। इस विरहमें अन्न पानी सब छोड़कर बाईस दिनतक रोते २ मृत्युतुल्य हो गये। फिर सत्गुरु प्रगट हुये और दर्शन दिया।