कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 277, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ें७ सातवों फिरिश्ता पोंब है जो चलने फिरनेको बतलाता है ।
८ आठवों फिरिश्ता जबान (जिह्वा) है जो भला और बुरा वचन बोलनेको सिखाता है ।
९ नवों फिरिश्ता आलातनासुल (जननेन्द्रिय) है जो मूत्र त्याग करने और संसारकी वृद्धि करनेका मार्ग बतलाता है ।
१० दशवों फिरिश्ता मेकअद (गुदेन्द्रिय) है जो शरीरके मलोंको बाहर निकालता है ।
११ ग्यारहवों फिरिश्ता दिल (मन) है जो इच्छा उत्पन्न करता है और राग द्वेष करता है । दिल वह नहीं है जिसको राक्षस मांसाहारी लोग कबाब बनाकर खाते हैं ।
१२ बारहवों फिरिश्ता इदराक (चित्त) है जो सर्व पदार्थोंका चिंतन करता है ।
१३ तेरहवों फिरिश्ता अहंकार है जो जीवनकी रक्षा करता है ।
१४ चौदहवों फिरिश्ता अकल (बुद्धि) है जिसे जिबराईल कहते हैं । जो सबके भेदको जानता है और सबको उपयुक्त मार्ग बतलाता है ॥
१५ पन्द्रहवों फिरिश्ता शहवत (काम-रजोगुण) है जिसको ब्रह्मा कहते हैं ।
१६ सोलहों तमीज (विवेक-सत्तोगुण) है जो सत्य असत्यका विचार बतलाता है इसीको विष्णु कहते हैं ।
१७ सत्तरहवों फिरिश्ता गजब (अहंकार-तमोगुण) हैं जो दुखदाई पदार्थोंसे रक्षा करता है इसीको शिव कहते हैं ।
इसी प्रकार पांच तत्त्व और सर्व प्रकृतियाँ आदि संसारके सर्व वस्तु फिरिश्ते हैं और जिस प्रकार शरीरका राजा जीव है, उसी प्रकार सब, जड़ चैतन्यका स्वामी निजस्वरूप साहिब है जिसके शरणमें जानेसे अटल सुख प्राप्त होता है ।
इति काफिरबोध ।
इकतीसवों प्रकरण ।
ग्वारहवों बेर कबीर साहबका प्रगट होना और शंकराचार्य संन्यासीको बोध देने और समझानेका वृत्तान्त ।
स्वामी शंकराचार्य और कबीर साहबकी गोष्ठी कबीर भानुप्रकाशमें विस्तारसे दिया है, वहांसे देखना चाहिये और इस कबीरमन्शूरके दूसरे भागके पहले अध्याय में भी देखो ।