कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 296, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंबालचरित्र है विविधि विधाना । सो संकेत न होय बखाना ॥
परचा जग अनेक परचारा । सो सब लिखित होय विस्तारा ॥
सबै विस्तार छांड़ि अब गाऊँ । रामानन्द गुरुको जस भाऊ ॥
चौवालिस्वों प्रकरण ।
बालककबीरका नीरूके घरसे अन्तर्धान होना ।
जब आप अन्तर्धान हो गये तब जोलाहा जोलाही आपको ढूंढने लगे वे दोनों चारों तरफ ढूंढते तथा रोते फिरते थे । उनको बड़ा दुःख हुआ । वे फूट फूट कर रोते तथा सबसे पूछा करते थे । समस्त नगरमें ढूंढ डाला पर आप कहीं नहीं मिले । उनको तीन दिवसोंपर्यंत भूखे प्यासे रहते बीत गये, अन्नजल कुछ भी उनके मुंहमें नहीं गया । वे अत्यंत निर्बल तथा अशक्य हो गये । जब आपने उन दोनोंको नितान्तही विह्वल पाया तब आय उनको सामने प्रगट हो गये । आपको देखतेही वे प्रसन्न होकर चरणोंपर गिर पड़े और अपने अपराधको क्षमा करवाना चाहा । कहने लगे कि, आप किधर चले गये ? हम ढूंढते २ हँरान हो गये । कबीर साहबने उत्तर दिया कि, तुमने महापाप किया कि, गऊको जबह करवाया । तब जोलाहा जोलाही अनेक सौगंधें खाने लगे कि, हमने यह कार्य नहीं करवाया बरन् हमें इस बातकी तनिक भी सुध नहीं थी—यह कार्य काजीका है । उन दोनोंने बहुत कुछ प्रार्थना तथा विनती कि, तब कबीर साहबने उन दोनोंको निर्दोष समझ लिया तब उनकै साथ गये, और रहने लगे । तबसे नीमा और नीरू सदा सचेत रहा करते थे ।
पैंतालीस्वों प्रकरण ।
बाल कबीरकी काफिरकी व्याख्या करना ।
जब आप छोटे २ बालकोंके साथ खेलते थे तब “राम राम” “गोविन्द गोविन्द” “हरि हरि” कहा करते थे, तब मुसलमान लोग सुनकर कहते थे कि, यह बालक कट्टर काफिर होगा । तब उनको कबीर साहब यह प्रत्युत्तर देते थे कि, काफिर वह होगा जो दूसरोंका माल लूटता होगा । काफिर वह होगा जो कपट भेष बनाकर संसारको ठगता होगा, काफिर वह है जो निर्दोष जीवोंका प्राण नाश करता होगा, काफिर वह होगा जो मांस खाता होगा, काफिर वह होगा जो मदिरा पान करता होगा, काफिर वह होगा जो दुराचार तथा बट-