भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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भावभावितात्मा लभते मोक्षं न सन्देहः” हृदयमें पूरी समता हो, सब बातोंमें समता समाई हुई हो, मोक्ष मिल जायेगा।

योगी गोरखनाथ।

गोरखनाथजी बड़े योगी हुए। समस्त योगियोंमें शैव गोरखनाथकी श्रेष्ठता है। गोरखनाथने चौरासी कल्प करके अपने शरीरको वज्र कर लिया। जैसे शिव वैसेही गोरखनाथको जानना चाहिए। इनका कबीरसाहबसे वाद विवाद हुवा था वह वृत्तान्त पढ़नेसे समस्त ए सब विवरण जाना जावेगा। योगक्रियाका जिनको अभिमान हो समझते हैं कि, योगक्रिया द्वाराही हमारी मुक्ति होगी, वो उनकी मूर्खता जानली जावेगी कि, योगक्रियामें केवल इतनाही बल है कि, समाधिमें ही मिला देवे। इससे विशेष नहीं। इस कारण योगभी व्यर्थ है। यद्यपि समस्त प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं, सो समस्त सिद्धियाँ अस्थायी तथा जलपरके फूल बूँटे हैं।

भगवाग बुद्ध।

मगध देशका राजा सिद्धोदन था उनकी रानीका नाम माया था। रानीको गर्भ रहा उससे बौद्ध उत्पन्न हुवा। उस बौद्धका नाम शाक्यमुनि रक्खा गया। वह उत्पन्न होनेके समय गर्भके बाहर निकल नहीं सका। माता मर गई तथा पेट फाड़कर बालक निकाला गया ऐसी किंवदन्ती है। जब वह बालक गर्भके बाहर निकला उसी समय खड़ा हो गया। पृथ्वीपर सात पग चला पुकारकर बोला कि, पृथ्वी तथा आकाशके बीचमें मेरे समान पूजनीय अन्य कोई देवता नहीं है। जब इस बालकका वय सत्रह वर्षका हुवा तो उसके तीन विवाह हुए। एक पुत्र उत्पन्न हुवा। इस शाक्यमुनिको सांसारिक धन तथा राजपाटकी कामना नहीं थी, यह उन्नीस वर्षके वयमें तपस्या करनेके निमित्त चला गया, बारहवर्षके उपरान्त परमेश्वरके दर्शन पाकर अपना धर्म, वेद यानी पूर्व भीमांसा (कें) विरुद्ध प्रचलित किया, बड़ी धूमधामसे यह धर्म प्रचलित हुवा। उसने हिंसाकी बड़ी निन्दा की। जैन तथा बौद्ध यह दोनों हिंसाके विरुद्ध हैं। जब इस धर्मकी प्रबलता हुई तो तब हिंसा दब गयी। यह बौद्ध विष्णुका अवतार कहलाता है। ये भी सत्य पुरुषका एक बड़ा अवतार है। इस धर्मके लोग अर्थात् बौद्ध कहते हैं कि, हमारा गुरु अर्थात् शाक्यमुनि आठसहस्र बेर उत्पन्न हुवा मरा, फिर भी अमर है कभी नहीं मरता, केवल आपका चोला बदलता जाता है। अब इस धर्मके लोग भारत वर्षमें नहीं हैं। परन्तु सब धर्मोंसे