कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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<tr>
<td>कुत्ता खाया, गलत यह भी, वाममागियोंसे</td>
<td></td>
<td>फरिस्ते हाक़्त और माक़्तकी शराबसे</td>
<td></td>
</tr>
<tr>
<td>तुलना</td>
<td>१७९</td>
<td>दुर्दशा</td>
<td>१९७</td>
</tr>
<tr>
<td>समभाव, ऊंच नीच, झूठा दावा, शुद्धोंके</td>
<td></td>
<td>अंगूरका रस और भांग</td>
<td>१९८</td>
</tr>
<tr>
<td>लिये नहीं हिन्दुशब्दका अर्थ</td>
<td>१८०</td>
<td>अफीउन और पोस्त तम्माखू पीना</td>
<td>"</td>
</tr>
<tr>
<td>झाहूणोंका नैर्वल्य तथा परशुराम</td>
<td>१८१</td>
<td>शरीरतसे तमाकू पीनेका दण्ड</td>
<td>"</td>
</tr>
<tr>
<td>अधिकता, अहिंसक सुखी हैं</td>
<td>१८२</td>
<td>तमाकू पीनेका दोष मद्यपानके दोष</td>
<td>१९९</td>
</tr>
<tr>
<td>हैयताका कारण, भ्रष्ट करनेवाला, रक्त-</td>
<td></td>
<td>उदाहरण</td>
<td>"</td>
</tr>
<tr>
<td>पातका काल, हत्याका प्रायश्चित्त</td>
<td>१८३</td>
<td>मदिराके बोवोंपर पारचात्य तत्त्वज्ञ</td>
<td>१०००</td>
</tr>
<tr>
<td>हिंसकोंके मारनेका कारण, सबसे हिंसक</td>
<td></td>
<td>कलेजे पर इसका परिणाम, इसका फ़ेफ़ड़े</td>
<td></td>
</tr>
<tr>
<td>और अहिंसक, पापी और कृत-कृत्य,</td>
<td></td>
<td>पर असर, धड़कन, आँखोंपर मद्यका</td>
<td></td>
</tr>
<tr>
<td>डखलाकी असूल, नूकितके अधिकारी</td>
<td>१८४</td>
<td>परिणाम, अंग्रेजी मद्यसे मृत्यु</td>
<td>१००१</td>
</tr>
<tr>
<td>यूरोपके विद्वानोंकी संमर्तियाँ, मिस्टर लार्ड-</td>
<td></td>
<td>कोढ़की बीमारी, दृष्टान्त</td>
<td>१००२</td>
</tr>
<tr>
<td>वक और मिस्टर गॉजिज़्ज़ाल्ट</td>
<td>१८५</td>
<td>विशेष वक्तव्य</td>
<td>१००३</td>
</tr>
<tr>
<td>समीक्षा, प्रकृति वैपरीत्य, बेजिटेरियन</td>
<td>१८६</td>
<td>सर्व धर्म</td>
<td>१००४</td>
</tr>
<tr>
<td>रालिन्ससाहब, प्रोफ़ेसर फ़ाक्स साहब,</td>
<td></td>
<td>धर्मका प्रयोजन, धर्मका स्वरूप</td>
<td>"</td>
</tr>
<tr>
<td>डाक्टर नैम्ब, कतिपय चिह्न</td>
<td>१८७</td>
<td>नियमोंकी आवश्यकता और सत्ता</td>
<td>"</td>
</tr>
<tr>
<td>मस्तिष्कके बलकी अपेक्षा, स्वभावका</td>
<td></td>
<td>नियमोंके भेद</td>
<td>"</td>
</tr>
<tr>
<td>परिवर्तन, प्रकृतिका नियम</td>
<td>१८८</td>
<td>ईश्वरीय नियम, परीक्षा, धारण</td>
<td>१००५</td>
</tr>
<tr>
<td>इधर उधरके प्रमाण।</td>
<td></td>
<td>मतमतान्तरके प्रचारक ज़ाता</td>
<td>१००६</td>
</tr>
<tr>
<td>मुहम्मदी फकीर, मुहम्मद साहबका कथन</td>
<td></td>
<td>धर्मकी जड़, गुरुभक्ति</td>
<td>१००७</td>
</tr>
<tr>
<td>शेख फ़रोदका भोजन, शाहू अली</td>
<td></td>
<td>श्रद्धा, विश्वास, गुरुदर्शन, गुरुमुखका कृत्य</td>
<td>१००८</td>
</tr>
<tr>
<td>कलंदर, रघुकी दया, सुवुकुतगीनके</td>
<td></td>
<td>मनमुख, दोनोंके कृत्य मनमुखके मुक्त न</td>
<td></td>
</tr>
<tr>
<td>शाह होनेका कारण</td>
<td>१८९</td>
<td>होनेका कारण, गुरु पूजाका माहात्म्य,</td>
<td></td>
</tr>
<tr>
<td>महापाप, कुत्तेके वचानेका महापुण्य</td>
<td>१९०</td>
<td>मजहबियोंकी ओर दृष्टि</td>
<td>१००९</td>
</tr>
<tr>
<td>मुन्सी मिश्रका सच्चा सिद्धान्त</td>
<td>"</td>
<td>स्वसंवेदका सार, बिन्दी</td>
<td>१०१०</td>
</tr>
<tr>
<td>घृणित दुर्गन्धि, महात्मा और राजा, कबीर</td>
<td></td>
<td>तीरीतकी आज्ञाएं, एक खुदा (ईश्वर)</td>
<td></td>
</tr>
<tr>
<td>साहब मांसमें शूरता नहीं</td>
<td>"</td>
<td>की पूजा करे, समीक्षा</td>
<td>१०१२</td>
</tr>
<tr>
<td>अपेयके पानका निषेध, स्वसंवेद</td>
<td>१९२</td>
<td>निराकार निरव्यवका पता नहीं</td>
<td>१०१३</td>
</tr>
<tr>
<td>दूसरे दूसरे प्रमाण, पूरवके नीचोंकी शराब</td>
<td></td>
<td>बुत परिस्तीको खुदा परिस्ती</td>
<td>१०१४</td>
</tr>
<tr>
<td>पीनेकी रीति</td>
<td>१९२</td>
<td>तीनों पुच्छ हैं</td>
<td>१०१५</td>
</tr>
<tr>
<td>नरकका चिह्न, राक्षस, टीटोटेलेर सोसा-</td>
<td></td>
<td>बुत परिस्ती मत करो</td>
<td>"</td>
</tr>
<tr>
<td>यटी, आधे मरे, नशेके दोष, प्रतिष्ठित,</td>
<td></td>
<td>खुदाका नाम बेफ़ायदा मत लो</td>
<td>१०१६</td>
</tr>
<tr>
<td>धिक्कार तथा अफ़सोसके पात्र</td>
<td>१९४</td>
<td>सत्यकबीर वचन</td>
<td>"</td>
</tr>
<tr>
<td>बुद्धिका नाशक, मांस खोर मद्य नहीं-</td>
<td></td>
<td>सबतका दिन याद रखो</td>
<td>१०१८</td>
</tr>
<tr>
<td>पीते, मद्यप मांस बिना नहीं रहते, सुलेमान,</td>
<td></td>
<td>माता पिताकी प्रतिष्ठा करो</td>
<td>"</td>
</tr>
<tr>
<td>अनेकोंका मांस खाया</td>
<td>१९५</td>
<td>खून मत करो, व्यभिचार मत करो</td>
<td>१०१९</td>
</tr>
<tr>
<td>मुहम्मद साहबके अक्षर तथा मद्यकी</td>
<td></td>
<td>चोरी मत करो</td>
<td>१०२०</td>
</tr>
<tr>
<td>गन्धसे सभी तप नष्ट</td>
<td>१९६</td>
<td></td>
<td></td>
</tr>
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