भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished1,367 पृष्ठ

पृष्ठ 46, कुल 1367 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 46
<table border="1"> <thead> <tr> <th>विषय.</th> <th>पृष्ठ.</th> <th>विषय.</th> <th>पृष्ठ.</th> </tr> </thead> <tbody> <tr> <td>कुत्ता खाया, गलत यह भी, वाममागियोंसे</td> <td></td> <td>फरिस्ते हाक़्त और माक़्तकी शराबसे</td> <td></td> </tr> <tr> <td>तुलना</td> <td>१७९</td> <td>दुर्दशा</td> <td>१९७</td> </tr> <tr> <td>समभाव, ऊंच नीच, झूठा दावा, शुद्धोंके</td> <td></td> <td>अंगूरका रस और भांग</td> <td>१९८</td> </tr> <tr> <td>लिये नहीं हिन्दुशब्दका अर्थ</td> <td>१८०</td> <td>अफीउन और पोस्त तम्माखू पीना</td> <td>"</td> </tr> <tr> <td>झाहूणोंका नैर्वल्य तथा परशुराम</td> <td>१८१</td> <td>शरीरतसे तमाकू पीनेका दण्ड</td> <td>"</td> </tr> <tr> <td>अधिकता, अहिंसक सुखी हैं</td> <td>१८२</td> <td>तमाकू पीनेका दोष मद्यपानके दोष</td> <td>१९९</td> </tr> <tr> <td>हैयताका कारण, भ्रष्ट करनेवाला, रक्त-</td> <td></td> <td>उदाहरण</td> <td>"</td> </tr> <tr> <td>पातका काल, हत्याका प्रायश्चित्त</td> <td>१८३</td> <td>मदिराके बोवोंपर पारचात्य तत्त्वज्ञ</td> <td>१०००</td> </tr> <tr> <td>हिंसकोंके मारनेका कारण, सबसे हिंसक</td> <td></td> <td>कलेजे पर इसका परिणाम, इसका फ़ेफ़ड़े</td> <td></td> </tr> <tr> <td>और अहिंसक, पापी और कृत-कृत्य,</td> <td></td> <td>पर असर, धड़कन, आँखोंपर मद्यका</td> <td></td> </tr> <tr> <td>डखलाकी असूल, नूकितके अधिकारी</td> <td>१८४</td> <td>परिणाम, अंग्रेजी मद्यसे मृत्यु</td> <td>१००१</td> </tr> <tr> <td>यूरोपके विद्वानोंकी संमर्तियाँ, मिस्टर लार्ड-</td> <td></td> <td>कोढ़की बीमारी, दृष्टान्त</td> <td>१००२</td> </tr> <tr> <td>वक और मिस्टर गॉजिज़्ज़ाल्ट</td> <td>१८५</td> <td>विशेष वक्तव्य</td> <td>१००३</td> </tr> <tr> <td>समीक्षा, प्रकृति वैपरीत्य, बेजिटेरियन</td> <td>१८६</td> <td>सर्व धर्म</td> <td>१००४</td> </tr> <tr> <td>रालिन्ससाहब, प्रोफ़ेसर फ़ाक्स साहब,</td> <td></td> <td>धर्मका प्रयोजन, धर्मका स्वरूप</td> <td>"</td> </tr> <tr> <td>डाक्टर नैम्ब, कतिपय चिह्न</td> <td>१८७</td> <td>नियमोंकी आवश्यकता और सत्ता</td> <td>"</td> </tr> <tr> <td>मस्तिष्कके बलकी अपेक्षा, स्वभावका</td> <td></td> <td>नियमोंके भेद</td> <td>"</td> </tr> <tr> <td>परिवर्तन, प्रकृतिका नियम</td> <td>१८८</td> <td>ईश्वरीय नियम, परीक्षा, धारण</td> <td>१००५</td> </tr> <tr> <td>इधर उधरके प्रमाण।</td> <td></td> <td>मतमतान्तरके प्रचारक ज़ाता</td> <td>१००६</td> </tr> <tr> <td>मुहम्मदी फकीर, मुहम्मद साहबका कथन</td> <td></td> <td>धर्मकी जड़, गुरुभक्ति</td> <td>१००७</td> </tr> <tr> <td>शेख फ़रोदका भोजन, शाहू अली</td> <td></td> <td>श्रद्धा, विश्वास, गुरुदर्शन, गुरुमुखका कृत्य</td> <td>१००८</td> </tr> <tr> <td>कलंदर, रघुकी दया, सुवुकुतगीनके</td> <td></td> <td>मनमुख, दोनोंके कृत्य मनमुखके मुक्त न</td> <td></td> </tr> <tr> <td>शाह होनेका कारण</td> <td>१८९</td> <td>होनेका कारण, गुरु पूजाका माहात्म्य,</td> <td></td> </tr> <tr> <td>महापाप, कुत्तेके वचानेका महापुण्य</td> <td>१९०</td> <td>मजहबियोंकी ओर दृष्टि</td> <td>१००९</td> </tr> <tr> <td>मुन्सी मिश्रका सच्चा सिद्धान्त</td> <td>"</td> <td>स्वसंवेदका सार, बिन्दी</td> <td>१०१०</td> </tr> <tr> <td>घृणित दुर्गन्धि, महात्मा और राजा, कबीर</td> <td></td> <td>तीरीतकी आज्ञाएं, एक खुदा (ईश्वर)</td> <td></td> </tr> <tr> <td>साहब मांसमें शूरता नहीं</td> <td>"</td> <td>की पूजा करे, समीक्षा</td> <td>१०१२</td> </tr> <tr> <td>अपेयके पानका निषेध, स्वसंवेद</td> <td>१९२</td> <td>निराकार निरव्यवका पता नहीं</td> <td>१०१३</td> </tr> <tr> <td>दूसरे दूसरे प्रमाण, पूरवके नीचोंकी शराब</td> <td></td> <td>बुत परिस्तीको खुदा परिस्ती</td> <td>१०१४</td> </tr> <tr> <td>पीनेकी रीति</td> <td>१९२</td> <td>तीनों पुच्छ हैं</td> <td>१०१५</td> </tr> <tr> <td>नरकका चिह्न, राक्षस, टीटोटेलेर सोसा-</td> <td></td> <td>बुत परिस्ती मत करो</td> <td>"</td> </tr> <tr> <td>यटी, आधे मरे, नशेके दोष, प्रतिष्ठित,</td> <td></td> <td>खुदाका नाम बेफ़ायदा मत लो</td> <td>१०१६</td> </tr> <tr> <td>धिक्कार तथा अफ़सोसके पात्र</td> <td>१९४</td> <td>सत्यकबीर वचन</td> <td>"</td> </tr> <tr> <td>बुद्धिका नाशक, मांस खोर मद्य नहीं-</td> <td></td> <td>सबतका दिन याद रखो</td> <td>१०१८</td> </tr> <tr> <td>पीते, मद्यप मांस बिना नहीं रहते, सुलेमान,</td> <td></td> <td>माता पिताकी प्रतिष्ठा करो</td> <td>"</td> </tr> <tr> <td>अनेकोंका मांस खाया</td> <td>१९५</td> <td>खून मत करो, व्यभिचार मत करो</td> <td>१०१९</td> </tr> <tr> <td>मुहम्मद साहबके अक्षर तथा मद्यकी</td> <td></td> <td>चोरी मत करो</td> <td>१०२०</td> </tr> <tr> <td>गन्धसे सभी तप नष्ट</td> <td>१९६</td> <td></td> <td></td> </tr> </tbody> </table>