कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 575, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंसुदर्शन है, काशी नगरीमें रहता है उसको ले आओ, जब वह आकर तुम्हारे गृहमें भोजन करेगा, उस समय तुम्हारी यज्ञ पूरी होगी सात बार आकाशी घण्ट बजेगा । बिना सुदर्शनके भोजन किये आसमानी घण्ट कदापि न बजेगा न यज्ञही पूरी होगी । तब युधिष्ठिरने कहा कि, हे महाराज ! भङ्गीको ऐसी बड़ाई कैसे मिली ? ऐसे बड़े बड़े महात्मा एकत्रित हुये, इनमें कोई इस योग्य नहीं ? यह क्या बात है ? श्रीकृष्णने कहा कि, हे युधिष्ठिर ! मेरा कहना मान ले श्वपच सुदर्शनको यहाँ लेआओ । पीछे भीमसेनको श्वपच सुदर्शनके बुलानेके लिये भेज दिया ।
भीमसेन सुदर्शनजीको बुलाने चले । काशी नगरीमें जा पहुँचे । दृढ़ते दृढ़ते श्वपच सुदर्शनका मकान पाया । जाकर सुदर्शन जीसे ! कृष्ण तथा युधिष्ठिरका समाचार पहुँचाया । भीमने कहा कि, हे सुदर्शनजी ! आपको कृष्ण तथा युधिष्ठिरने बुलाया है । आप मेरे साथ चलिये । हमारे यज्ञमें भोजन कीजिये, आपके भोजन करनेसे यदि घण्ट बज जायगा तो हमारी यज्ञ पूर्ण हो जायगी । राजा युधिष्ठिर आपपर बड़े प्रसन्न होंगे, एवं बड़ा अनुग्रह करेंगे । ऐसा सुनकर सुदर्शनजीने उत्तर दिया कि, हे भीमसेन ! तुम राजाके पासजाकर कहो कि, हम राजाके घरका भोजन न करेंगे ।
चौ०—भीम कहो राजासे जाई । राजा घर भोजन नहीं पाई ।
राजा वेश्या^१^ जात शिका^२^री । महा अक^३^र्मी विषय विक^४^ारी ॥
सतसठ दूत^५^ कर्म इन सङ्ग^६^। भोजन करत सत्य हो भङ्गा^७^ ।
राजा वेश्या छु^८^चे न कोई । इनके छुए^९^ पाप बड़ होई ॥
राजाद्वार^१०^ भोजन जो पावे । अरु वेश्या^११^ही छुये नरक महाँ जावे ॥
राजा धीमर वेश्यापा^१२^सी । इनके छुये यमपुर जासी^१३^ ॥
साखी—चार^१४^ जातिके दर्शन, दूरते कीजे जान^१५^ ।
इनके घर भोजन किये, पडे नरककी खान^१६^ ॥
इतनी बातके सुनतेही भीमसेन तो जल गये । मनमें सोचने लगे कि, यह नीच मुझको ऐसी बात कहता है । यदि मैं इसको एक गदा मारूँ तो यह पातालको चला जावे । जब भीमसेनने अपने मनमें यह विचार किया, तब श्वपच सुदर्शनजी महाराजने भीमसेनके अन्तःकरणकी बातोंको जानकर
१ करेंगे । २ रंठी । ३ जीर्वाहसक । ४ बुरे कर्म करनेवाले । ५ विषयी । ६ चुगलखोर । ७ सात । ८ नष्ट । ९ स्पर्श । १० स्पर्श किये । ११ राजेके घर । १२ वेश्याके । १३ एक, प्रकारके जीवहत्यारे । १४ जायेगा । १५ राजा, १४ धीमर, वेश्या और पाशी । १६ मत । १७ कुण्ड ।