भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 58

अंगरेजी अहद (राज्य) में किसी मिस्कीन (गरीब) फक़िरपर कोई जुल्म व जोर नहीं कर सकता और वे लोग खुशीके साथ अपना मकसद (आशय) जाहिर कर सकते हैं। सब और झूठ सबका इजहार और इनसाफ होता है। कोई किसीपर किसी तरहका जब वतअदी (जो जुल्म) नहीं कर सकता। अब उन जालिमो (अत्याचारियों) की सलतनत (राज्य) जमीनसे उठगयी, जबकि मिस्कीन और बेगुनाह दुश्वेषोंको कद और कत्ल और तरह तरहकी स्यासत (शासन) करते थे, उस वक्त फुकरा अपनी रास्ती (सच्चाई) का इजहार (प्रकाश) नहीं कर सकते थे। अब बादशाह और हुकामोंकी मदे नजर देखकर इस फकीरने भी दिलेरीकी और जो इल्म इसमें था, और है, सीना (हृदय) से निकालकर सफीना (कागज) पर, बमुलाहिजे नाजरीनके रखकर उमीदवार इन्साफका है।”

इस बारभी आपने कबीरमन्शूरको आठही भागोंमें विभक्त किया है किंतु पहली आवृत्तिकी अपेक्षा, विषयमें वृद्धि और सुधारके अतिरिक्त क्रममें भी उलट पुलट किया है। वह इस प्रकार है -

प्रथम भागमें तीन अध्याय और अनेक प्रकरण हैं।

दूसरे भाग में दो अध्याय और सौ के लगभग प्रकरण हैं।

तीसरे भागमें भी दोही अध्याय और कई प्रकरण हैं।

चौथे भागमें आवागमनका विषय है जो कई अध्याय और अनेक प्रकरणोंमें वर्णित है।

पाँचवें भागमें - पशुओंकी बुद्धिमानीका वर्णन है। जिसमें छः अध्याय और प्रत्येक अध्यायोंमें अनेक प्रकरण हैं।

छठे भागमें तीन अध्याय और अनेक प्रकरणोंमें मद्यमांसादि निषेध पदार्थों का वर्णन है। इस छठे भागका विषय प्रथमके छोटे कबीरमन्शूरमें आठवें भागमें था सो अब छठे भागमें आगया है।

सातवें भागमें पाँच अध्याय और प्रत्येक अध्यायमें अनेक प्रकरण हैं। इस भागमें जो विषय वर्णित है सो पहले कबीरमन्शूरके छठे भागमें था।

आठवें भागमें गुरु शिष्यके सम्वादमें अनेक जानने योग्य विषय और उप-वेषोंका वर्णन है। जिसमें अनेक अध्याय और प्रकरण हैं।

इस प्रबंधसे बड़े कबीरमन्शूरको समाप्तकर अन्तमें आप उसकी समाप्तिकी तिथि लिखते हुए इस प्रकार लिखते हैं -