भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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तारीख खातमा ।

शुक्र' बेहद' परम गुरु गोविंद । की सरंजाम' बूसख'ए दिलब'न्द ॥
करम' व फजल' उसपै सतगुरुका । जो समझकर पढे सुने यह पन्द' ॥
इससे हीरी' न कोइ शर्बत और । आवहैवा' न शोरब मिश'री कन्द ॥
पाव पहचान जो कोइ मृशिद'को । हो दफा' सब जहा'न का दुख दन्द ॥
कर अमल' गर' निगर' न चश्म' अपने । राज' महरिम' न हो तोबर' मन' खन्द' ॥
ईस्वी सन अठारह सौ अस्सी । उन्नीस सौ पैंतीस विक्रमा सने हिन्द ॥
महे' सितम्बर व हिन्दवी' आस्विन । खतम' तारीख' नुसख'ए' चारुमचन्द' ॥
मैं उसीका हूँ खादमान' खादिम । जिसके दरगह' न पहुँचे कोई परिन्द' ॥
आजिज' व तखलुस' आजिज । नाम जिसका है दास परमानन्द ॥

पहले (छोटे) कबीरमन्शूरमें भी समाप्तिकी यही तारीख लिखी हुई है, क्योंकि असलमें कबीरमन्शूर ग्रन्थ बही है किंतु इसमें, सुधारा बधारा करनेके कारण, अंतमें आपको, उसकी तिथि तारीख भी, जाननेकी जरूरत पड़ी, इसलिये आप लिखते हैं —

राकि साधु परमानन्ददासजी कबीर पंथी मुकीम शहर फिरोजपुर मुल्क पंजाब किस्मत लाहौर, तारीख तरमीम और तरतीब दूसरीबार मोबरखे २५ अपरेल सन १८८७ ई० व मुताबिक सम्बत १९४४ विक्रमी बैशाख सुदी २ सोमवार ।

इसके पश्चात यह ग्रंथ सन् १८९१ ई. माह सितम्बर व मुताबिक भादो सम्बत १९४८ विक्रमी में छपकर तैयार हुआ ।

अंति टाइटिल पेज (मुखपत्र) पर आप एक विज्ञप्ति, इस प्रकार लिखते हैं । बाजह हो कि, जो साहब दानाय दोरान इस किताब कबीरमंशूरको पढ़ें, अपने दिलमें खूब गौर और फिक्र करें कि, कबीर साहब कौन हैं ? कि, जिनका यह दिल और दीमाग है कि, दावा खुदाईका करते हैं और आपमें सारा जलाल लायजाल दिखाते हैं और आपका कौल बमोजिब फेलके हैं । कौल व फेल जाहिर व बातिन एकसा है सरेम फर्क नहीं ।

जिस हालतमें कि, सारे वेद व स्वसम्बेद और रिषिशरान हर से जमान भी जाहिर करते हैं कि, कबीर साहब खुद कादिर मुतलक खालिक आलम हैं,


१ धन्यवाद २ अनन्त ३ पूरा ४ किताब, ग्रन्थ ५ मनलगन, मनचाही, सुन्दर ६ कृपा ७ श्रेष्ठता ८ नसीहत, उपदेश ९ मीठा १० अमृत ११ पीनेकी वस्तु १२ गृह १३ नाश १४ संसार, जगत. १५ कर्म व्यवहार. १६ यदि १७ देखे १८ आँख १९ भेद २० जानकार २१ ऊपर २२ मेरे २३ हँसों २४ महीना २५ हिन्दी २६ समाप्ति २७ तिथि २८ पूर्ण चन्दके समान सुंदर २९ दासानुदास ३० दरबार ३१ पक्षी, उड़नेवाला भाव है बड़े बड़े बुद्धिमान् बुद्धि दो डानेवाले ३२ दीन ३३ उपनाम.

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