भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 602, कुल 1367 में से

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पृष्ठ 602

चुन चुन फूलों सेंज बिछाई कलियाँ न्यारी न्यारीका ।
सो अब शयन करें धरतीमें कंकर नहीं बोहारेका ॥
जिनके सङ्ग कटक दल बादल झण्डा न्यारे न्यारेका ।

कहैं कबीर सुनो भाई साधो फक्कड़ हुआ आखाड़े का ॥ सुलताना०

इस बादशाहको कबीर साहबने अनेकों उपदेश दिये । बहुतेरे कौतुक दिखाये (जो भिन्न भिन्न पुस्तकोंमें पाये जाते हैं) बादशाहके मनमें संसारकी बड़ीही घृणा होगई । चाह्ता कि, बादशाहतको छोड़कर कहीं वनमें चला जाऊँ । इस बातका दृढ़ संकल्प उसने कर लिया । उसके आत्मसम्बन्धी अमीर बजीर और सब कर्मचारियोंने इसे घेर लिया समस्त सैन्यमें हल्ला मच गया कि, सुलतान फकीर होता है । जब सभोंने बादशाहको घेर लिया तब वह बड़ाही विवश हुआ । इसी घेर घारमें आधीरात बीत गई । जब आधीरात हुई तब सब मनुष्य और सब चौकीदार अचेत होकर सो रहे । उस समय बादशाहने अच्छा और समझा । नङ्गे पैर बाहर आकर अपनी सैन्य तथा आदमियोंसे दूर निकलके एक बड़े भारी मैदानमें पहुँचा जहाँ कि किसी आदमीका चिह्न भी नहीं था । उधर बादशाहके नौकर चाकर तथा आत्मसम्बन्धीगण जब जागे तब बादशाहको चारों ओर दूढ़ने लगे; पर कहीं पता नहीं लगा । तब निराश हो गये समस्त देशमें हाहाकार और शोक पड़ गया इधर बादशाहको तीन दिन भूखे बीत गये उस समय स्वयम् साहब बादशाहके निमित्त रूखा सूखा टुकड़ा लेकर सामने आये । वही रूखा टुकड़ा बादशाहने तीन दिवसके उपरान्त खाया परमेश्वरको धन्यवाद देकर पक्का फकीर हो गया । इस बादशाहको जब जब कबीर साहब मिलते थे तब तब न्यारे न्यारे स्वरूपोंमें दिखाई देते थे कि, वह और तो क्या पहचान भी नहीं सकता था ।

इसका वृत्तान्त मुसलमानी पुस्तकोंमें स्थान स्थानपर लिखा है । एक पुस्तकमें मैंने देखा था कि, इस बादशाहको पकड़कर लोगोंने एक अमीरकी बागवानी (माली) के काममें लगा दिया । एकवर्ष पर्यन्त आप बागवानी करते रहे । एक दिवस वह अमीर अपनी बाटिका देखने गया तब जैसा बागवानोंका नियम है बागके फल अनार इत्यादि लेकर उन्होंने उस अमीरकी भेंट किये । जब उसने अनारोंका चक्खा तो, सभीको खट्टा पाया । तब उसने कहा कि, कौसा बागवान है कि, मेरे निमित्त सब खट्टे अनारोंको उठा लाया । फकीरी भेषमें बने हुए बादशाहने उत्तर दिया कि मुझको खट्टे मीठेका ज्ञान नहीं है । क्योंकि, मैंने कभी चक्खा नहीं था । अमीरने पूछा कि तू कितने दिवसोंसे

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