कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 627, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंपड़े । तब दरियाखों उनके समीप आकर कहने लगा कि, आपपर इतने पत्थर पड़े पर आपने आहतक नहीं कि, मैंने तो केवल एक फूलकी पाँखुरी ही चलाई थी । इसके लगते आप हाय हाय करके गिर पड़े इसका कारण क्या है ? कमालजीने कहा कि, सुन दरियाखों ! तू शिष्य था मैं तेरा गुरु था । तूने परमेश्वरका भय न किया मेरी इतनी अप्रतिष्ठा की । मुझको पत्थरोंने इतना घायल नहीं किया जितना तेरे फूलने किया है । तूने संबारको पसंद किया उससे मित्रता की । अब तेरी मुक्ति न होगी, तू भूत होगा । इस बातपर दरियाखों पश्चाताप करने लगा तथा दुखी होकर क्षमाकी प्रार्थना की, परम कमालजीने उसे क्षमा नहीं किया । इधर नौवाब मुहम्मदशाहके शरीरमें आग लग गयी वह जलने मरने लगा । तब क्षमा २ कहता हुआ कमालजीके चरणोंपर गिरकर कहने लगा कि, मेरा अपराध क्षमा करो मुझको अपना शिष्य बनाओ ।
मुहम्मद शाहकी अत्यन्त नश्रुता तथा निवेदनको देख, कमालजी दयालु हुए । शाहके शरीरकी जलन मिट गई, वह कमालजीका शिष्य हो गया । जब स्वयम् नौवाब उनका शिष्य हुआ तब कमालजी भली भाँति उपदेश तथा शिक्षा देने लगे । उस समय कमालजीके बहुत सेवक तथा साठ शिष्य होगये पर दरियाखोंका अपराध क्षमा नहीं किया । तब फिर कमालजी मुहम्मदशाह और दरियाखों इत्यादि मनुष्यों सहित बनारसमें कबीर साहबके निकट गये । उन सबोंने सत्य-गुरुको दण्डवत् प्रणाम करके द्रव्य तथा मणि माणिक भेंट किया । वह देखकर सत्यगुरुने कहा कि, हे कमाल ! तू मेरा योग्य शिष्य नहीं है । कंकर पत्थर धन दौलत काहेको लाद लाया, हम साधु हैं । इन सब वस्तुओंसे हमें क्या काम है ? यह कहकर सब गरीबोंको बाँट दिया । उस समय दरियाखोंने सत्यगुरुके सामने दोहाई दी कि, मुझसे यह दोष होगया । वो मैंने क्षमा प्रार्थना की पर मेरा अपराध क्षमा नहीं होता । आप मेरा अपराध क्षमा कीजिये । कबीर साहबने दरियाखोंसे कहा कि, यदि मैं तेरा अपराध क्षमा करदूँ तो मेरे धर्ममें विभिन्नता आती है । क्योंकि, गुरुकी श्रेष्ठता मैंनेही स्थापित की है वो मर्यादा न रहेगी । मेरे नियममें बाधा उपस्थित होगी । इस कारण तू अपने सत्यगुरुसे क्षमा माँग । कमालजीको डाँट दिया कि, तू जो इस प्रकार श्राप देगा तो गुरुवाई योग्य न होगा । तूने उसको श्राप क्यों दिया ? तू इसका अपराध क्षमा कर । * कमालजीने दरियाखोंका अप-
- अहमदाबादमें कबीर पन्थियोंमें प्रसिद्ध है कि, कमाल साहबने दरियाखाँका अपराध क्षमा करते समय इस प्रकार कहा था कि, जब तुम्हारा कन्न फट जावेगा और गुम्मज दीख जायेगा उसी दिन भूतयोंनिसे मुक्त होंगे । कई वर्षोंसे दरियाखाँकी कन्न फट गई और गुम्मज तथा दीवारें आर पार दक्क गई हैं । इस घटनाके कारणसे लोगोंकी दन्तकथा प्रमाणित हुई है और लोगोंका विश्वास बहुत बढ़ा है । अहमदाबादमें कमाल टेकरा नामसे एक प्राचीन स्थान भी है—