भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 89, कुल 1367 में से

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पृष्ठ 89

चले जाओ और मेरे द्वारको पूर्ववत् बूढता पूर्वक बंद करदो, मैं कलियुगके मनुष्योंका दर्शन नहीं करूँगा । तब राजाने आज्ञा दिया कि, इस द्वारको पहलेही की तरह बंदकर दो, तथा कोईभी किसी प्रकारकी बाधा न देवे । यह राजाज्ञा तुरन्तही मानी जाकर कार्यमें परिणत कर दीगयी । इस प्रकार वेदमें बड़ा गडबड हुआ ।

इसी प्रकार जो किताब जितने प्राचीन हैं—उनमें उतनीही गडबडीभी हैं । तौरत तथा इज्जीलमें मुसलमान लोग विशेष गडबड बतलाते—और भली भाँति साबित करते हैं स्वर्गवासी मास्टर रामचन्द्र देहलवी सितारे हिन्दने तथा अन्यान्य पादरियोंने कुरानमें गडबडके बारेमें बहुत कुछ लिखा है और एजाज कुरान नामक पुस्तकमें पूर्वोक्त सितारे हिन्द महोदयने बूढ़ प्रमाणों द्वारा प्रमाणित किया है और सियानतुलइनसान नामक किताबमें हाफिजने इज्जलिके गडबडके बारेमें बहुत कुछ लिखा है । डाक्टर वजीरख़ाँनेभी लिखा है—इन सब किताबोंमें गडबड होते २ उनकी असली अवस्था नहीं रही सबसे गडबड तथा अशुद्धियाँ हैं ।

स्वसंवेदकी शुद्धता ।

पर स्वसंवेदमें यह बात हो नहीं सकती. कारण यह कि, कबीर साहब स्वसंवेदके रचयिता प्रत्येक समय, प्रत्येक काल तथा प्रत्येक स्थानमें उपस्थित रहते हैं । जो कोई किसी प्रकारका परिवर्तन करे, तो उसको काटकर पुनः ग्रंथोंको शुद्ध करके मनुष्य जातिको सत्यपथ पर लगाते हैं । किन्तु और समस्त सम्प्रदायिक ग्रंथोंमें गडबड हुआ करता है ।

चौवीसवाँ प्रकरण

संसारके लौकिक पारलौकिक सब धर्मोंका मूल वेद ।

यद्यपि लौकिक पारलौकिक मर्यादाको बना रखनेके समस्त ज्ञान देनेवाले उपर्युक्त चार वेदही हैं । जो देशकालानुसार किसी न किसी रूपमें सर्वत्र प्रचलित रहकर, संसारकी स्थितिको संभाले रहते है । यही अविनाशी वेद संसारके समस्त ज्ञान विज्ञानके मूल भंडार हैं । संसारके समस्त धर्म और नीति इसीसे निकलते हैं । सदासे सबका यही आधार है, वही संसारका सर्वस्व है । किन्तु संसार के अज्ञानी अल्पज्ञ जीव इस बातको न जाननेके कारण, परस्पर विभिन्नताको देखते और एक एक पक्षको पकड़कर लड़ते झगड़ते रहते हैं । यदि वे यह जान जाते और विचार करके निश्चय करलेते कि, देशकालके अनुसार वेदके एक-एक अंश अथवा फरमानको लेले कर संसारके सर्व धर्म, पंथ मजहब इसीसे निकले हैं तो, वे परस्पर वैमनस्यके शिकार कदापि नहीं होते ।

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