कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंबोधसागर
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फिसाद करते हैं तब खुदाने कहा कि, बड़ा छोटेकी सेवा करके बड़ाई पावेगा । फिर इसहाकने ज्येष्ठपुत्र ईसूको बरकत देनी चाही पर उस बरकतको छोटा पुत्र याकूब ले गया । इसहाक-कीयुक्तिने काम नहीं दिया ।
देखो मूसाकी पहली पुस्तक २५ बाबका २१-२२-२३ आयत ।
इनके उपरान्त हजरत मूसा थे वह भी अपने कार्यमें स्वतंत्र नहीं थे । कारण यह कि परमेश्वरने मूसाको मिस्रमें फिर्हूनके सिखलानेके लिये भेजा और यह भी कह दिया था कि फिर्हूनके मनको मैं कड़ा करूँगा । वह तेरा कहना न मानेगा । मूसाकी शिक्षा किसी काम न आई ।
मूसाके उपरान्त हजरत ईसाने खुदासे बहुत प्रार्थनाकी कि सलीबसे बच जाऊं पर नहीं बचे ।
इसके उपरान्त मुहम्मद मुस्तफाने बहुत कुछ बललगाया और रक्तपात किया तो भी सबको मुसलमान कर नहीं सके यह बात सब कहकर और नहीं दिखाकर फिर मैंने पादरी साहबसे कहा कि इन महाशयोंमें तो कोई स्वतन्त्र नहीं ठहरा । कदाचित् आपके नाम अब खुदाई परमाना कार्य स्वतन्त्रताका उतर पड़ा हो तो क्या आश्चर्य है? मेरी बातें सुनकर पादरी महाशय चुप हो रहे और फेर मुखतारीका दावा छोड़ दिया ।
केवल कबीर साहबको ही स्वतन्त्रता है दूसरेको नहीं । कारण यह है कि, जब वे मनसे छुटकारा दिलाया चाहते हैं उसको अवश्य छुटाही लेते हैं और जो कुछ करना चाहते हैं करही लेते हैं उनका रोकनेवाला दूसरा नहीं ।