भारतकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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जनधर्मबोध

( ५१ )

अथ चौबीस तीर्थकरके नाम वर्णन

दोहा-ऋषभ नाथ प्रथमै कहो, अजित नाथ कह फेर । शंभो अभिनंदन कहो, सुमतिनाथजी टेर ॥ पदम प्रभू क्षुपारसो, चंद्र प्रभू बखान । पुष्पदंत शीतल श्रेयस, वासपुञ्ज पुनि जान ॥ बिमल अनन्तो धर्मनाथ, शांतिकुन्थ नाथोय । अर्हनाथ अरु मल्लजी, मुनि सुवृत्त कह जोय ॥ निमनाथो नेमनाथ कह, पारसनाथ कहोय । महावीर नाथो कहो, अन्त तिर्थकर सोय ॥

इति

अथ बारह चक्रवर्तियोंके नाम

दोहा-भरथ सगर मघवा कहो, सनतकुमार गनाय । सांतिनगधकुंथनाथजी, अर्हनाथ कहवाय ॥ पुनि सुभूमि पञ्चो विजय, हरिखेनो ब्रह्मदत्त । सारी पृथ्वी बश करे, कर निज्ज चक्र गहत्त ॥

अथ नौ बलिभद्रके नाम

दोहा-विजय अचलजी धर्मधर, बहुरि सुप्रभुजी होइ । फेर सुदर्शन जानिये अरु सुनन्द कहै जोइ ॥ नन्दमित्र पुनि लेखिये, रामचंद्र पुनि जान । पञ्च फेर कहि मानिये, नौ बलिभद्र प्रमान ॥

अथ नौ नारायणके नाम

दोहा-प्रथम दुपिष्ट तृपिष्टजी, बहुरि स्वयंभू गाय । पुरुषोत्तम नरसिंहजी, पुण्डरीक बतलाय ॥ केवल दत्त बखानिये, फेर लक्ष्मण मान । कृष्णचन्द्र नौमैं कहो, यदुकुल दीपक जान ॥