भारतकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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( ३६ )

अनुरागसागर

सावित्री कस दूसर नाऊं । कहि पुहुपावति वचन सुनाऊं॥ तीनों मिलिके चलि भे तहवां । कन्या आदिकुमारी जहवां ॥

ब्रह्माका गायत्री और सावित्री के साथ माताके पास पहुँचना

और सबका शाप पाना

करि प्रणाम सन्मुख रहे जाईं । माता सब पूछी कुशलार्ह ॥

अद्यावचन ब्रह्माप्रति

कह ब्रह्मा पितु दर्शन पाये । दूसरि नारि कहाँसे लाये ॥

ब्रह्मावचन

कह ब्रह्मा दोऊ हैं साखी । परस्यो सीस देव इन आंखी॥

अद्यावचन गायत्रीप्रति

तब माता बूझे अनुसारी । कहु गायत्री वचन विचारी॥

तुम देखा इन दर्शन पावा । कहा सत्य दर्शन परभावा ॥

गायत्रीवचन

तब गायत्री वचन सुनावा । ब्रह्मा दर्श सीस पितु पावा ॥

मैं देखा इन परसेउ शीशा । ब्रह्महि मिले देव जगदीशा ॥

छन्द

लेह पुहुप परसेउ शीशपितु इन दृढमें देखत रही॥

जल दार पुहुप चढ़ाय दीन्ह हे जननि यह है सही ॥

पुहुपते पुहुपावती भयी प्रगट ताही ठामते ॥

इनहु दर्शन लह्यो पितुको पूछहु इहि वामते ॥२६॥

हे जननी यह है सही तुम पूछि लो पुहुपावती ॥

सबही सांच मैं तोसों कहूँ नहीं झूठहै एको रती ॥

अद्यावचन पुहुपावतीप्रति

माता कह पुहुपावतीसी कहो सत्य हि मो सना ॥

जो चढ़े सीसाहि पिताके तुम वचन बोलहु ततखना॥

१ यह छन्द पुरानी प्रतियोंमें नहीं है

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