कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 164, कुल 2136 में से
संदर्भ में पढ़ें( ३६ )
अनुरागसागर
सावित्री कस दूसर नाऊं । कहि पुहुपावति वचन सुनाऊं॥ तीनों मिलिके चलि भे तहवां । कन्या आदिकुमारी जहवां ॥
ब्रह्माका गायत्री और सावित्री के साथ माताके पास पहुँचना
और सबका शाप पाना
करि प्रणाम सन्मुख रहे जाईं । माता सब पूछी कुशलार्ह ॥
अद्यावचन ब्रह्माप्रति
कह ब्रह्मा पितु दर्शन पाये । दूसरि नारि कहाँसे लाये ॥
ब्रह्मावचन
कह ब्रह्मा दोऊ हैं साखी । परस्यो सीस देव इन आंखी॥
अद्यावचन गायत्रीप्रति
तब माता बूझे अनुसारी । कहु गायत्री वचन विचारी॥
तुम देखा इन दर्शन पावा । कहा सत्य दर्शन परभावा ॥
गायत्रीवचन
तब गायत्री वचन सुनावा । ब्रह्मा दर्श सीस पितु पावा ॥
मैं देखा इन परसेउ शीशा । ब्रह्महि मिले देव जगदीशा ॥
छन्द
लेह पुहुप परसेउ शीशपितु इन दृढमें देखत रही॥
जल दार पुहुप चढ़ाय दीन्ह हे जननि यह है सही ॥
पुहुपते पुहुपावती भयी प्रगट ताही ठामते ॥
इनहु दर्शन लह्यो पितुको पूछहु इहि वामते ॥२६॥
हे जननी यह है सही तुम पूछि लो पुहुपावती ॥
सबही सांच मैं तोसों कहूँ नहीं झूठहै एको रती ॥
अद्यावचन पुहुपावतीप्रति
माता कह पुहुपावतीसी कहो सत्य हि मो सना ॥
जो चढ़े सीसाहि पिताके तुम वचन बोलहु ततखना॥
१ यह छन्द पुरानी प्रतियोंमें नहीं है