भारतकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 1896

( १८१८ )

बोधसागर

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कहा कि, मैं समस्त सृष्टिका रचयिता हूँ । तब बादशाहने एक गाय मैंगवायी और सामने हलाल करवाकर कबीर साहबसे कहा कि, यदि आप परमेश्वर हो तो इस गायको जीवित करो । कबीर साहबने बादशाहसे कहा क्या ईश्वरकी परीक्षा इसीसे होती है तुम्हारे पीरने तुम्हें यही उपदेश किया है ? इतना कहकर-

चुटकी तारी थाप दे, गऊ जिलाई बेग ।

गरीबदास दूहन लगे, दूध भरी है देग ॥

जब शाहने गायको हलाल करवाय और कबीर साहबसे कहा कि, इस गऊको जीवित करो तब कबीरसाहबने उस गायको थापी दिया, चुटकी मारा, उसी समय वह गाय उठ खड़ी हुई और उसका सब घाव तथा दर्द मिट गया । उसका स्तन दूधसे भर गया और उसके दुग्धसे बरतन भर गये जिसको ( उस दुग्धको ) पीकर लोग अत्यन्त हर्षित हुए । और शाह सिकन्दर तथा उसके सभासदगण इस कौतुकको देखकर अत्यन्त आश्चर्यान्वित हुए । बादशाहने विशेष श्रद्धा विश्वास किया ।

शेखतकीका क्रोध और कबीर साहबकी कसनी

जब शाह सिकन्दरके पीर शेखतकीने देखा कि, अब तो शाह सिकंदरने कबीर साहब पर बहुत विश्वास किया और उनकी अत्यन्त प्रतिष्ठा तथा मर्यादा करता है तब वह जल मरा, कारण यह कि, वह बड़ा ही द्वेषी तथा ईर्षा करनेवाला था । तब उसने बादशाहसे कहा कि ऐ सिकन्दर ! आपने जोलाहेने प्रेम तथा मुझसे वैर किया । तब बादशाहने कहा कि, ऐ गुरुजी ! आप तो मेरे पीर हो और वह एक दुरवेश ( साधु ) है । आपने आज्ञा दिया था कि, गुरु तथा फर्क