कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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कबीर चरित्रबोध
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उसके गाँवके निकट भ्रमण करते हुए पहुँचे और विश्राम करनेके लिए नदी तटपर बैठे । जब रामदास स्नान करनेके निमित्त गया तो वहाँ कबीर साहबको बैठे देखा, तब उसने निवेदन किया कि, महाराज ! आप समर्थ हो मुझको विष्णु दर्शन करवाओ । तब कबीर साहबने उससे कहा कि कल दोपहरको विष्णु तुम्हारे घरपर जावेंगे । यह बात सुनकर रामदासको निश्चय हुआ कि, कबीर साहबका वचन हुआ है । अब विष्णु निश्चय कल मेरे घर आवेंगे तब उसने अपने घर जाकर बड़ी तैयारी की दूसरे दिवस घरको भली भाँति स्वच्छ और पवित्र कराया विछोने इत्यादि विछवाये और नाना प्रकारके स्वादिष्ट भोजन पकवाये । और सिंहासन इत्यादि रखकर प्रतीक्षा करते हुए बैठे कि, अब विष्णु महाराज आया चाहते हैं । कुछ कालके उपरान्त देखा तो एक भैंसा कीचड़से लतपत आया और उस फर्शके ऊपर बैठ गया । तब रामदासको अत्यन्त क्रोध आया कि, इस भैंसेने फर्शको बिगाड़ दिया । सोटा लेकर इस भैंसेको मार भगाया जब दिवस व्यतीत हो गया कोई नहीं आया । तब वह ब्राह्मण निराश हुआ । जब प्रातःकाल वह नदी स्नानके निमित्त गया तब फिर कबीर साहबको उसी स्थान पर बैठा देखकर कहा कि, महाराज ! मुझको विष्णु महाराजका दर्शन तो न हुआ आपकी बातें मिथ्या कैसे हुईं । तब कबीर साहबने कहा कि, ऐ रामदास ! मेरे कथनानुसार विष्णु तुम्हारे घर गये परन्तु तुमने अच्छी विष्णुपूजा की, सोटे मारकर भगा दिया । यह बात सुनकर वह ब्राह्मण लज्जित तथा दुःखी हुआ । कारण यह कि, विष्णुका भक्त था इससे जान लिया कि, विष्णु भैंसाके सरूपमें थे ।
नं. ११ बोधसागर -