कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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बोधसागर
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कमालीका प्रकट होना
कमालको कबीर साहबने सुरदासे जीवित किया तब शेख-तकीने कहा कि, मैं इस लीलाको नहीं मानता कारण यह कि, यह लड़का सकते मेंथा इस कारण जीवित हो गया—मेरी बेटी आठ दिवसोंसे कब्रमें मरी पड़ी है यदि आप उसको जीवित करें तब सुझे विश्वास हो । कबीर साहब सिकन्दर शाह और शेखतकी सहित उस लड़कीकी कब्रपर गये । वहाँ पहुँचकर कबीर साहबने पुकारा ‘उठ शेखतकीकी बेटी’ वह नहीं उठी; फिर कहा ‘उठ शेख-तकीकी बेटी, फिर भी वह न उठी तब तीसरी बेर कबीर साहबने कहा उठ ‘कबीरकी बेटी’ उस समय वह लड़की जीवित होकर कब्रसे निकल पड़ी । शेखतकी उसके जीवित होनेसे उसका हाथ पकड़कर अपने घरको ले चले; तब उस लड़कीने कहा कि, मैं तुम्हारे नामसे जीवित नहीं हुई हूँ—वरन् कबीर साहबके नामसे उठी हूँ । अब मैं कबीर साहबकी बेटी हूँ अब मैं इनके साथ रहा करूँगी, तुम्हारे गृहपर न जाऊँगी । वही लड़की कबीर साहबकी बेटी प्रसिद्ध हुई और उसका हृदय सत्यगुरुकी कृपासे प्रकाशित हो गया ।
तेरह गाड़ी कागजोंका लिख जाना
बादशाहने तेरह गाड़ी सादे पुस्तकोंकी कबीर साहबके पास भेजी और कहा कि, मैं तब विश्वास करूँगा जब आप उन समस्त पुस्तकोंको ढाई दिवसमें लिख देंगे । जब वे पुस्तकें कबीर साहबके पास पहुँची तब कबीर साहबने अपनी लाठी उन सब पुस्तकोंपर फेरकर कहा कि, इन लिखी हुई किताबोंपर क्या लिखें ? बादशाहको यह लीला देखकर विश्वास हो गया कि, कबीर साहबने उन ग्रंथोंको दिल्लीमें गढ़वा दिया ।