कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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बोधसागर
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कदापि न हटेगा और न कहना मानेगा । तब कबीर साहबने कहा कि, ऐ सर्वांनन्द अब तुम्हारी क्या कामना है और किस बातके इच्छुक हो ? तब सर्वांनन्दने कहा कि, मेरी विजय लिख दो तब कबीर साहबने कहा कि, मैं तो लिखना नहीं जानता तुम स्वयम् लिख लो तब सर्वांनन्दने लिख लिया कि, कबीर साहब हार गये और सर्वांनन्द जीत गये । भली भांति लिखकर तथा वह विजय पत्र कबीर साहब तथा अन्यान्य लोगोंको दिखलाकर अपने घरको चले और आनकर अपनी मातासे कहा कि, माता मैं कबीर साहबसे वादविवाद करके उनपर विजय पा गया हूँ । तब माताने कहा कि, ऐ पुत्र ! मुझको तो विश्वास नहीं होता कि, तुम कबीर साहबपर विजयी हुए हो । तब सर्वांनन्दने कहा कि, मैं विजयपत्र लिखवा लाया हूँ तू देख ले । तब माताने कहा कि कागज निकालो । जब कागज निकाला और पढ़ा तो उसमें लिखा था कि सर्वांनन्द परास्त हो गए और कबीर साहब विजयी हुए । यह लिखा देखकर आश्चर्यान्वित हुए कि, यह तो मेराही लिखा था यह उलटा कैसे हुआ । कदाचित् मैं लिखनेमें भूल गया और मातासे कहा कि मातः ! मैं लिखनेके समय भूल गया अब पुनः जाता हूँ और अत्यंत सावधानीपूर्वक ले आऊंगा । तब सर्वांनन्द पुनः कबीर साहबके पास आये और कहा कि, मैं लिखनेमें भूल गया अबकी बेर सँभाल कर लिखूँगा । तब कबीर साहबने कहा कि भली प्रकार सँभालकर लिखो तब फिर सर्वांनन्दने उसी विषयको भली प्रकार सँभालकर लिखा और अपनी माताके समीप आकर प्रकट किया कि अब मैं सँभाल कर लिख लाया हूँ । जब कागज खोला तो वही पूर्वकी बात लिखी पाई कि, कबीर साहब विजयी हुए तथा सर्वांनन्द