भारतकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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बोधसागर

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नहीं दिया है और यथार्थ में हैही यही बात कि कबीरपंथ की जैसी और पुस्तकोंमें कर्ताका नाम नहीं है किन्तु वह कबीरपंथी पुस्तक कहलाती है और कबीर साहब तथा धर्मदास साहबके सम्बादमें लिखी गयी हैं ॥

इस पुस्तकके अतिरिक्त और भी निर्भयज्ञान आदि अनेक पुस्तकोंमें सुलतान इब्राहीम अह्मके विषयमें बहुत कुछ बात आयी है जिनमें परस्पर बहुतही भेद हैं और कितने विषय ऐसे हैं जो एकमें हैं और दूसरेमें नहीं हैं । इस कारण शाह इब्राहीम अह्म साहेबका वृत्तान्त गद्यमें संक्षेप लिख देता हूँ क्योंकि विस्तारसे लिखनेके लिये एक स्वतंत्र पुस्तक लिखनेका विचार है ।

सुलतान शाह इब्राहीम अह्म साहिबका

संक्षेप चरित्र

उत्पत्ति

इस सुलतान इब्राहीम शाहके पिताका नाम अह्म शाह था । आप संसार त्यागी फकीर थे । अपनी फकीरी और तपस्यामें पूरे थे । वस्तीसे सदा अलग रहते थे । प्रारब्धसे जो कन्द, मूल, फल अथवा नाज मिल जाता था उसी पर अपना समय बिताते थे किन्तु कभी एक स्थानमें जमकर नहीं रहते थे । कभी उनने घर नहीं बांधा । कहा भी है कि,

साखी-बहता पानी निर्मला, बन्धा गन्दा होय ।

साधू जन रमते भले, दाग न लागे कोय ॥

कुछ समय तक तो ऐसेही निःसंग फिरते रहे । फिरते फिरते एक बार बलख शहरमें पहुँचे । ठहरनेके लिये तो शहरसे दूर उन्होंने जंगलमें निश्चय किया किन्तु नित्य शहरमें फिरनेके

नं. ६ कबीरसागर - ३