कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंबोधसागर
( ८७ )
माता पिताने बड़े प्रेमसे इब्राहीमको पालना आरम्भ किया । दो वर्षके पश्चात् उनको अन्न प्राशन कराया ॥
दो बरस पूरेका जब वह हो गया । और गिजा फिल जुमले वह खाने लगा ॥ गैबसे आने लगनेा दिरत आम । कुदरते एजिदसे उसको विलदवाम ॥ उसकी बर्कत से लगे अशजार पर । अच्छी अच्छी वज अकेशीरी समर ॥ कुदरते हकसे हुआ वह दशतोबर । गुलशनों गुलजार पर भी फौकतर ॥
आखिरकार देखते देखते बालक इब्राहीम सात बरसके हो गये । अब अह्मशाहको इस बातकी चिन्ता हुई कि बालकको विद्या अभ्यास कराना चाहिये सबसे पहले जैसा मुसलमानोंमें रीति है बालकको कुरान पढ़ाना आरम्भ किया । जब कुछ दिनों तक घेरमेंही पढ़ाकर देख लिया तब एक दिन बालकको गोदमें लेकर अह्मशाह शहरमें गये वहाँ दूँदते दूँदते एक सज्जन मोलवी साहेब मिले जिनके यहाँ इब्राहीमके पढ़नेको ठीक करके उनसे कह दिया कि, सबेरे मैं इब्राहीमको यहाँ रख जाया करूँगा और शामको आकर लेजाया करूँगा ।
अलगरज हर सुबह वह मढ़नेको ।
लाता उस मुकतबमें इब्राहीमको ॥
उलफते कलवीसे अपने विलदवाम ।
फिर उन्हें लेनेको आता वक्त शाम ॥
था यही हररोज अह्मका शआर ।
आते जाते शहरमें विलइजतरार ॥
थी जेबस शफकत उन्हें बेइन्तहा ।
तनहा आना जाना दिलपर शाकथा ॥
( इब्राहीम अह्मका बादशाह बनना )
जबसे बलखके बादशाहकी इकलौती बेटीका उससे वियोग हुआ तबसे बादशाह बहुत उदास और दुखी रहने लगा ।