कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंबोधसागर
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जहाज में कोई गरीब भूखा मिल जाय तो उसे रुपया दो रुपया देकर अपना काम निकाल लो । आखिर कार हूँढते हूँढते उस अमीर के आदमियोंने शाह इब्राहीम अह्मको किसी कोने में बैठा हुआ पाया । इनका विचित्र वेष और बढी हुई दाढी वगैरह देखकर सबने पागल समझ कर उन्हें पकड़ लिया और अमीरके मजलिस में लाकर बैठा दिया । फिर तो भाँडों ने मनमानी की । जितने खेल खेलते अन्तमें सब उन्हीं पर उतारते अंतमें जब उन्हें बहुत तकलीफ हुई तब आकाश बानी हुई कि, अगर तुम कहो तो इस जहाजको डुबाकर इन सब मूर्ख बदमाशोंको इनके किये का दण्ड देदूँ । शाह इब्राहीमने बड़े धीरज के साथ कहा कि,
खींच कर सीनेमें अपने एक आह । बोला इब्राहीम ऐ मेरे अल्लाह ॥ कुछ नहीं हस अमरमें इनकी खता । करता अगरबसीरत इनको तू अता ॥ कजरवी क्यों करते ऐ दानायराज । फेल बदसे आप करते एहतराज ॥ राह में गर बेबसर के चाहहो । जो न रोके उसको वह गुमराह हो ॥ मर्द बीना को है लाजिम दे बता । वरन गया उसका खून उसने लिया ॥ वह है या रण्ब जूर्म असियासे बरी । कुछ नहीं उसमें खता उनकी जरी ॥ क्योंकि गफलतसे है मसल्लुबुल हवास । जेहल नादानी से मकल्लुबुल हवास ॥