कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंबोधसागर
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दूसरी ओरसे बुलाते हैं। इस दशा में संसारमें रहने की इच्छा किस प्रकार हो सकती है। इसलिये मैंने मौतको और मरघट को अन्तिम स्थान जानकर सेवन करना आरम्भ किया है।
वार्ता ७
एक बार फकीर हो जाने के बहुत दिन पीछे शाह इब्राहीम अद्दम बलखमें गये और शहरसे बाहर एक जलाशय के किनारे बैठे। आने जाने वालों ने उन्हें देख कर पहचाना और उनके बेटे को जो उस समय वहाँ के बादशाह थे उनके आने की खबर दी।
बादशाह बापके आने की खबरको सुनकर चट सवारी मँगाकर बहुतसे मुसाहेब और नौकर चाकरों को साथ लिये हुये वहाँ पहुँचा। शाह इब्राहीम के आनेका समाचार जैसे ही बलख के लोगों को पहुँचा वैसे ही जो जिस दशामें था अपना अपना काम छोडकर दौड पडा। थोडी ही देरमें शाह इब्राहीम के निकट बडा भारी मेला लग गया।
सुलतान इब्राहीम के पास में सिवाय एक गुदडी के दूसरा वस्त्र या पात्र आदि कुछ नहीं था। कठिन तपस्या के कारणसे उनका शरीर भी बहुत दुबला पतला और कमजोर देख पडता था। बापकी वह दशा देखकर बादशाह बने हुए आत्म दृष्टिसे शून्य बेटेने कहा पिताजी ! आपने बादशाहत छोडकर संसार भरका कष्ट अपने शिर उठाके क्या लाभ उठाया ?।
जो आपका शरीर मखमल और फूलोंकी शय्या पर सोने-वाला था अब उसके लिये टाट भी आपके पास नहीं है जिसके सम्मुख हजारों दास दासियाँ सेवा करनेके लिये हाथ जोड़े खड़े रहते थे आज वही इस प्रकार बेकस और लोचारक समान