कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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सुलतानबोध
आपसे लकड़ियाँ लेलीं और उसके बदले में रोटियाँ दे दीं । आप रोटी लेकर जमातमें आये और साथियों के आगे रख दीं । लोग रोटी खाने लगे और आप भजन में लगे ।
सुलतान इब्राहीम अह्मद साहेब सदा अपने चेलोंसे कहा करते थे कि, 'देखो बेदाढी मूँछके लड़के और स्त्रियों से सदा सचेत रहना उनकी ओर कभी ध्यान देकर मत देखना" । उनके शिष्यवर्ग सदा उनकी आज्ञाका पालन करते थे ।
काबाकी परिक्रमाके समय संयोगसे सुलतान इब्राहीम अह्मद का लड़का उनके सन्मुख आगया । आपने दृष्टि भरकर उसकी ओर देखा । शिष्य लोग उनके उस कामसे आश्चर्यमें आये । जब परिक्रमा कर चुके तब आपके शिष्योंने आपसे हाथ जोड़कर विनय किया कि दीनबन्धु हमको तो आपने आज्ञा दी है कि बिना मूँछ डाढी वाले बालकों और स्त्रियोंकी ओर दृष्टि मत करना किन्तु परिक्रमाके समय आपने स्वयम् एक बालककी ओर टकटकी लगाकर देखा था इसका क्या कारण है ?
शिष्योंकी बातको सुनकर आपने उत्तर दिया कि जिस समय मैं बलख छोड़कर चला था उस समय मेरा एक छोटा लड़का था मुझे इस लड़केको देखते ही ऐसा जान पडा कि यह वही लड़का है । आपकी बात सुनकर आपके शिष्योंमें से एक शिष्य यात्रियोंके स्थानमें गया और बलखके यात्रियोंको दूँदते दूँदते आपके पुत्रके पास पहुँचा । उस समय वह लड़का अपने खीमें बैठा हुआ पुस्तक पढ़ रहा था और रो रहा था उस शिष्यने जाकर उस लड़केसे पूछा कि आप कहाँसे आये हैं । लड़केने कहा—बलखसे आया हूँ । फिर उसने पूछा आप