भारतकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 857

बोधसागर

( ११७ )

किसके लड़के हैं ? उत्तर मिला कि, इब्राहीम अब्दमके उसने पूछा कि, आपने उनको देखा है ? लड़केने कहा कलके सिवाय मैंने उनको कभी नहीं देखा किन्तु मुझे यह भी निश्चय नहीं है कि, जिनको मैंने देखा है वह मेरे पिता हैं कि, नहीं । उनसे इस डरके मारे कि वो तो हम ही लोगोंसे भाग कर यहाँ आये हैं कहीं हमको जानकर यहाँसे भी कहीं भाग न जावे कुछ न पूछा । आपके उस शिष्यने कहा कि, आप मेरे साथ आइये मैं आपको आपके पितासे मिला दूँ । फिर तो दोनों माँ बेटे और बहुतसे आदमी उस शिष्यके साथ चले जब सब आपके सामने आये तब आपकी स्त्रीने आपको देख लिया देखते ही वह विकल होगयी और रोने लगी । फिर लड़केसे बतलाया कि, देखो तुम्हारे बाप यही हैं ? लडका भी रोने लगा । उस समयकी दशा ऐसी करूणापूर्ण थी कि आपके सब शिष्य भी उनके साथ रोने लगे । मोहने करूणाके स्वरूपमें सबके ऊपर अपना जाल फैलाया ।

लडका रोते रोते बेहोश होकर गिर पडा जब चेतमें आया तब बापके पग पर गिरकर प्रणाम किया । आपने उसे गले लगाया फिर उससे उसके पढने लिखने और धर्मकी बातोंको पूछकर आपने चाहा कि, वहाँसे उठकर चले जावें किन्तु आपके स्त्री और पुत्रने न छोडा तब थोडी देरतक चुप रहनेके बाद आपने आसमानकी ओर मुहँ करके कहा हे प्रभु ! तू मेरी सहायता कर आपका इतना कहना था कि, पुत्र आपहीके गोदमें मृत्युको प्राप्त हुआ ।

शिष्योंने लडकेको मरते देखकर पूछा या सतगुरु ! यह क्या हुआ ? आपने कहा जिस समय मैंने इस लडके को गले