कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( १२४ )
सुलतानबोध
वार्ता १७
सहलविन इब्राहीम नामक संतने कहा है कि एकबार वो सुलतान इब्राहीमके साथ सफर में थे, संयोगसे वो बीमार पड़ गये। सुलतानके पास जो कुछ बस्त्रादि था बेंचकर उनकी रक्षामें लगा दिया अन्तमें जब कोई सवारी भी नहीं रही तब सहलविन इब्राहीमने कहा “ मैं बहुत कमजोर हो गया हूँ अब आगे कैसे जासकूंगा ? ” आप उन्हें अपनी गर्दनपर बैठाकर तीन मंजिल-तक लेगये, जबतक वो अच्छे भी हो गये ❁
वार्ता १८
सुलतान इब्राहीम अद्भमके साथ जो कोई रहनेकी इच्छा प्रकट करता था। आप उससे तीन बचन ले लेते थे तब उसको अपने साथ रखते थे।
१ पहला नियम उनका यह था कि, आप किसीसे सेवा नहीं कराकर सबकी सेवा आप ही करते थे।
२ दूसरा नियम यह था कि, भजन करनेके समय का सबको सूचना देना अपने ऊपर रखवा था।
३ तीसरा नियम यह कि, मण्डली का कोई आदमी भी सुकृति की कमाई से जो कुछ कमा के लाता था उसको मण्डली में समान उपयोगमें लगाते थे।
इन नियमोंमें से एक भी नियम जिसको अस्वीकृत होता था उसको अपनी मण्डली से बाहर करदेते थे।
- नोट—धन्य है इस पर उपकारको। आजकलके साधुओंको ध्यान देकर इस बातको विचारना चाहिये क्यों कि, वर्तमान में साधुओंकी यह नीति हो गई है कि, सफर तो सफर किसी विशेष स्थान पर भी कोई बीमार पड़जाय तो उसे एक गिलास पानी तक देना बुरा समझते हैं। मैंने बहुतसे ऐसे दृष्टान्त देखे हैं और स्वयं भी उनके संग रहकर भोग लिया है।