भारतकोश
कबीरपंथी शब्दावली

कबीरपंथी शब्दावली

Kabirpanthi Shabdavali

स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा

स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)

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शब्दावली

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इस पदपर आनेके कितने पहलेही, निवृत्तिमें सत्संग और विचार परायण रहने और आगेके लिये स्थानको सुरक्षित रखनेके हेतु, कुल जायदाद सहित स्थानको आपने कवीर साहबके नामसे समर्पण) करके, रजिष्ट्री करा दी है और स्थानपर पश्चात्के लिये ट्रस्ट्री (पंच) नियत कर दिया है तथा व्यवहारके भारसे अवकाशके लिये, अपने समझही महंत श्रीअवधदासजीको अपना उत्तराधिकारी बना दिया है ।

श्रीमहंत अवधदासजी साहब भी, योग्य गुरुके योग्य शिष्यके समान, अपने पदका कर्तव्य पूर्णरूपसे निबाह रहे हैं। आपको सहायक भी बैसेही योग्य मिले हैं ।

स्थानके समुचित प्रबन्धमें जिन लोगोंके हाथ हैं और जिनकी सज्जनता और सुप्रबन्धसे स्थान अपनी मर्यादाकी रक्षा करके आदर्शस्थान बना हुआ है उनमेंसे —

(१) पहले श्रीमान् मॅनेजर साहब श्री सूर्यदासजी साहब हैं । आप बहुत दिनोंसे स्थानके मॅनेजर रहे हैं और इस समय वृद्ध होकर एक प्रकारसे अवकाश ग्रणह करनेपर भी, आवश्यकता होनेपर सब कामोंको देखते और उनका प्रबन्ध करते हैं । आप पूर्ण अनुभवी वैद्यराज्य हैं, आपके पास रससे लेकर साधारण काष्ठादि तककी अनेक औषधियाँ सदा तय्यार रहती हैं, स्थानकी मूर्तियोंके तो आप प्राणदाताके समानही हैं, बाहरके भी अनेक दुखियोंके दुःख दूर करनेमें आप सदा तत्पर रहते हैं ।

(२) दूसरे खजांची नत्यूदासजी साहब हैं । आपका काम स्थानकी कुल नकदी जिन्सी आमदनीका सुप्रबन्ध करना, जमीनदारी सम्बन्धीभामला मुकद्दमाकी खबरगोरी करना खेती बाड़ी आदिका प्रबंध करना इत्यादि हैं, आपकी प्रमाणिकता इतनी बड़ी हुई है कि, सब ओरसे सब लोग द्रव्यादि लाकर आपको देते हैं, परन्तु आपके हिसाब देनेको सदा तय्यार रहनेपर भी, कोई हिसाब नहीं पूछता क्योंकि, आपके व्यवहारने सबको निश्चय दिला दिया है कि, इन्होंने अपनेको पूर्ण रूपसे कवीर साहबके अर्पण कर दिया है, शील और सदाचारकी आप मूर्ति हैं साथही स्थानकी मर्यादा रक्षाके लिये आपमें स्वाभिमान और आत्म प्रतिष्ठाकी कमी नहीं है इत्यादि ।

(३) तीसरे श्रीयुत परमहंस भित्तादासजी साहब अधिकारी हैं । आपने सर्व प्रकारके मान अभिमानके त्याग पूर्वक, भेदभाव रहित सर्वप्रकारके जीवोंकी