कबीरपंथी शब्दावली
Kabirpanthi Shabdavali
स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा
स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)
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कवीरपंथी—
सेवा करना अपना आदर्श बना रखखा है। आपकी इस वृत्तिकाही प्रभाव है कि, सब मतके लोग आपसे प्रसन्न रहते हैं, ऐसा होते हुए भी आप सत्यका त्यागकर किसीकी झूठी खुशामद कभी नहीं करते। दुखियोंकी, तन मन धनसे, सेवा करना आपका स्वभावही है।
(४) चौथे श्रीगोपीदासजी अधिकारी हैं, जिन्होंने स्थानकी खेती बाड़ी काशतकारीकी देखरेख सब अपने जिम्मे ले रखा है।
(५) पांचवें भंडारी सौखी दासजी हैं, जिन्हें सदा सर्वदा दुखी जीवोंके लिये, अपने मुखका त्याग करना कोई कठिन बात नहीं दीख, पड़ती आप बड़े श्रीमहंत साहबके खास भंडारी और शिष्य हैं। इसी प्रकार भंडारी नेभूदासजी भंडारी जगादासजी कोठारी रामअधीन दासजी, रामधनीदासजी, झड़ी, दासजी, अनूपदासजी इत्यादि सर्व संत दया और प्रेमकी मूर्ति, द्वेष और भ्रमतासे रहित, सदा परोपकाररत रहनेवाले, स्थानकी मर्यादा बना रखनेमें सचेत रहते हैं।
श्रीयुत महंत चंचल दासजी, गोविन्ददासजी, भौजनदासजी, खाकीजी इत्यादि सङ्गीत द्वारा स्थानकी शोभारूप हैं।
श्रीयुत गंगादासजीको सद्गुरुकी वाणीसे इतना प्रेम है कि, आप सदा-वाणीकीही खोजमें लगे रहते हैं, आपहीके वाणी प्रेमकी प्रत्यक्ष मूर्ति गंगाशब्दावली है, जिसमेंसे लक्ष्मीपुर (रोसडा) के कवीरमन्दिरके चौकाविधानकी रमैनी पद आदि लिये गये हैं॥
इसके अतिरिक्त स्थानमें रहनेपर उससे सम्बन्ध रखनेवाले जितने व्यक्ति हैं सबमें सज्जनता कूट कूटकर भरी है, सब सदा सर्वदा अपने ऊपर कष्ट उठाकर भी दूसरोंको मुख देनेमें तय्यार रहते हैं और तो विद्यार्थी रामजी जो स्थानमेंही रहता और स्थानकी सेवा टहल करता हुआ, विद्या अध्ययन कर रहा है, साधुओंकी संगतिमें रहता हुआ ऐसे सरल स्वभावका हो गया है कि, कभी किसीकी अवज्ञा करना जानताही नहीं, जिसने जहां जिस कामके लिये पुकारा रामजी वहाँ रामजीके समान हाजिर मिलेगा। अंतमें —
श्रीरामरूपदासजीको लीजिये; आप बड़े महंत साहब या यों कहिये कि, वंशगद्दीके आचार्य स्थानापन्न धार्मिक कर्मोंके सम्पादन करनेवाले कवीर साहबके अधिकारी श्री १०८ युक्त पंथी महंत काशी दासजी साहबके परम प्रिय शिष्य