कबीरपंथी शब्दावली
Kabirpanthi Shabdavali
स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा
स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)
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और प्राइवेट सेक्रेट्री हैं। आप हरफन मौला हैं, आप जिस प्रकार अपने टकसार और धार्मिक ज्ञान ध्यानमें कुशल हैं, उसी प्रकार व्यवहारमें पूरे हैं, आप कवि लेखक, मुंशी, कचहरीके कार्यमें कुशल, जमीन्दारी, दुकानदारी आदि कामोंमें चतुर, अधिक क्या कहूँ जिस कामका प्रसंग आपके सम्मुख, आज्ञाचे आप सबमें अग्रसर रहनेवालोंमें हैं, साथही आप इतने दयालु और मिलनसार हैं कि, सदा सर्वदा भेदभाव रहित सबकी सहायता करनेको तय्यार रहते हैं। जिस कामको हाथमें लेते हैं उसमें पूरे तौरसे जुट जाते हैं। श्रीयुत गंगादासजीके संग्रह किये हुए शब्दोंका सम्पादन कर आपहीने उसे प्रकाशित करवाया है। कबीरचन्द्रोदय मासिकपत्रके तो आप एक प्राण स्वरूपही हैं।
श्रीमान् संतदासजी साहब उर्फ बाबा साहेब स्थानके सरदारोंमें हैं, आप सर्व गुण पूर्ण, परम विरक्त, सत्यधर्म परायण संत हैं, आप सर्वदा, भ्रमण करके जीवोंको चेतता और सत्यधर्म का प्रचार करते रहते हैं। पूर्ण विरक्त होनेपरभी आप व्यवहारको कुशलतासेभी बँचित नहीं हैं, स्थानके किसीभी व्यवहारिक कार्यमें आवश्यकता होनेपर, आप उसको सुचारुरूपसे पूर्ण करते हैं, आपकी दर्शनोय मूर्ति और आनन्दी स्वभावके कारण सबही आपसे प्रसन्न रहते हैं। आप शान्ति रसकी मूर्ति होते हुए भी, हास्यरसमें ऐसे दक्ष हैं कि आपकी एकही बातमें शोकातुर मनुष्योंको भी हँसी आ जाती है। आप जिस प्रकार सुन्दर अक्षर लिखनेमें निपुण हैं वैसेही पाकशास्त्रमें पूर्ण प्रवीण हैं।
इसी प्रकार पण्डित वसंत दासजी वैराग्य गम्भीरता और विचारकी मूर्ति हैं। एक स्थानधारी साधुओंमें सौजन्यता, प्रेम, दया, व्यवहार, कुशलता आदि जितने गुण होने चाहिये सब आपमें वर्तमान हैं।
श्रीसाधु ज्ञानचन्द्र दासजी भी स्थानके वैसे विरक्त साधुओंमेंसे एक हैं, जो सदा भ्रमण कर सेवक सतियोंको उपदेश देकर सजग करते और कालके जालसे बचाते रहते हैं।
इसके अतिरिक्त संकटों मूर्ति इस स्थानके इस समय सत्य कबीरके उपदेशका प्रचार कर सत्यधर्मकी वृद्धिमें लगे हुए हैं।
इसी प्रकार रोसडा स्थानकी प्रत्येक बातें आदर्श रूप हैं। इस समय तो यह स्थान मेरे अनुभवसे अपने धार्मिक टकसारमें अपनी उपमा आपही है। इसका कारण और कुछ नहीं, केवल “यथा राजा तथा प्रजा” के अटल नियम काही फल है।
श्री १०८ महंत साहबके सदाचार और दया क्षमा आदि गुणों सहित धर्म प्रेमही इनका एक मात्र कारण है।