कबीरपंथी शब्दावली
Kabirpanthi Shabdavali
स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा
स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)
पृष्ठ 415, कुल 968 में से
संदर्भ में पढ़ेंशब्दावली
(४०१)
अकँल अँनीह अँबाध अँभेद । नेति नेति के गावे वेद ॥ सोहँवृत्ति अखण्डित रहै । एक दोय अब को तहँ कहै ॥ जानि परी तब नित्यँाकार । झाँई सो भ्रम महा बेकार ॥
संभव शब्द अमान जो, झाँई प्रथम विकार ।
परखेउ धोखा भेव निज, गुरुकी दया उवार ॥ ८ ॥
पहिले एक शब्द समुदाय । बावन रूप धरे छितराय ॥ इच्छा नारि धरे तेहि भेश । ताते ब्रह्मा विष्णु महेश ॥ चारिउ उरपुर बावन जागे । पंच अठारह कंठहिं लागे ॥ तालू पंच शून्य सो आय । दश रसनाके पूत कहाय ॥ पांच अघर अघरहीमा रहै । शुभ्रे कंठ समोघे वहै ॥ ओठ कंठ ले प्रगटे ठौर । बोलन लागे औरके और ॥
एक शब्द समुदाय जो, जागै चार प्रकार ।
कालशब्द संधिशब्द, झाँई औ पुनी सार ॥ ९ ॥
पाँचँ तीँ नि नाँछाँ आँचार । और अँठारह करे पुकार ॥ कर्म धर्म तीरथके भाव । ई सब काल शब्दके दाव ॥ सोहँ आत्मा ब्रह्म लखाव । तत्व मसी भूँत्युंजय भाव ॥ पंचकोश नवँकोश बखान । सत्य झूठमें करे अनुमान ॥ ईश्वर साक्षी जाननिहार । ये सब संधिक कहै विचार ॥ कारजकारण जहाँ न होय । मिथ्याको मिथ्या कहि सोय ॥ बैनँ चैन नहिं मौन रहाय । ई सब झाँई
५७ कला अंश रहित. ५८ इच्छा रहित. ५९ बाद रहित. ६० भेव रहित. ६१ लगन स्थाल. सुरत. ६२ सत्य रूप. ६३ पांच तत्व ६४ तीनगुण. ६५ नौ व्याकरण. ६६ छः शास्त्र. ६७ चार वेद ऋगवेद १ यजुर्वेद २ सामवेद ३ अथर्ववेद. ६८ अठारह पुराण. १ मारकण्डेय पुराण २ मत्स्य पुराण. ३ सागवत. ४ मविष्य पुराण ५ ब्रह्मा वैवर्तक. ६ ब्रह्माण्ड पुराण. ७ ब्रह्मपुराण. ८ विष्णुपुराण. ९, शिवपुराण १० वाराहपुराण. ११ वायुपुराण १२ अग्निपुराण १३ नारद पुराण. १४ पद्म पुराण १५ कूर्मपुराण. १६ स्कन्द पुराण. १७ लिंग पुराण १८ गरुड पुराण. ६९ नाम वायु ७० अन्नमय प्राणमय, मनोमय, ज्ञानमय, विज्ञानमय (आनंदमय) ७१ उपरौक्त ५ और शब्दमय. १ प्रकाशमय. ३ आनंदमय. ४ वेखो बीजक के ५० वीं साखीकी टीका पृष्ठ ३६१ और कबीर मंशूर बड़ा पृष्ठ ६९६. ७२ वाणे.