भारतकोश
कबीरपंथी शब्दावली

कबीरपंथी शब्दावली

Kabirpanthi Shabdavali

स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा

स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)

Devanagarihipublished968 पृष्ठ

पृष्ठ 535, कुल 968 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 535

शब्दावली

(५२१)

अथ वेलि प्रारंभः ।

प्रथम वेलि ।

हंसा सरवर शरिर हो रमैया राम । जागत चोर घर मूसल हो रमैया राम ॥ १ ॥ जो जागे सो भागे हो रमैया राम । सोवत गैल वियोग हो रमैया राम ॥ २ ॥ आज बसेरा नियरे हो रमैया राम । काल्ह बसेरा हरि हो रमैया राम ॥ ३ ॥ परेहु बिराने देश हो रमैया राम । नैन मरेंगे हूँठ हो रमैया राम ॥ ४ ॥ त्रास मथन दधि मथन कियो हो रमैया राम । भवन मध्यो भर पूरि हो रमैया राम ॥ ५ ॥ हंसा पाहन मैल हो रमैया राम । बेधिन पद निर्वाण हो रमैया राम ॥ ६ ॥ तुम हंसा मत माणिक हो रमैया राम । हटल न मानेहु मोर हो रमैया राम ॥ ७ ॥ जसरे कियो तस पायो हो रमैया राम । हमर दोष जनि देहु हो रमैया राम ॥ ८ ॥ अगम काटि गम कीन्हो हो रमैया राम । सहज कियो व्योपार हो रमैया राम ॥ ९ ॥ राम नाम धन बानि- जहु हो रमैया राम । लादहु वस्तु अमोल हो रमैया राम ॥ १० ॥ पांच लदनवा लादि चले हो रमैया राम । नौ बहिया दश गौन हो रमैया राम ॥ ११ ॥ पांच लदनुआ खांगि परे हो रमैया राम । खाखरि डारिन खोर हो रमैया राम ॥ १२ ॥ शिर धुनि हंसा उड़ि चले हो रमैया राम । सरवर मीत जोहरि हो रमैया राम ॥ १३ ॥ आगि लगी सरवरमें हो रमैया राम । सरवर जरि भौ छार हो रमैया राम ॥ १४ ॥ कहैं कवीर सुनु संत हो रमैया राम । परखि लेहु खर खोट हो रमैया राम ॥ १५ ॥

वेलि दूसरी २ ॥

भल सुस्मृति जहँडायहु हो रमैया राम । धोखा कियो विस- वास हो रमैया राम ॥ ११ ॥ सोतो है बंसी कसि हो रमैया राम ।