सामग्री पर जाएँ
भारतकोश
कबीरपंथी शब्दावली

कबीरपंथी शब्दावली

Kabirpanthi Shabdavali

स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा

स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)

Devanagarihipublished968 पृष्ठ

पृष्ठ 829, कुल 968 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 829

शब्दावली

(८१५)

छोडके, भरम भरम बुध मत खोई ॥ टे० ॥ नेम धर्म व्रत संजम पूजा, बहुत भांत हर सोधे। सत्य सोहाग कैसेके पावे, अच्छर कंथ विरोधे॥ नारी पुरुष रहत एक संगा, निस दिन जात अबोले। तजि अभिमान मिलत नहिं पियको, बन बन दूदत डोले॥ कहैं कवीर सुनो भाइ साधू, बूझे बिरला सोई। प्रेम प्रीत अंतर कछु औरै, कहा न माने कोई ॥

शब्द १३९-खाय लिये सब दुनियां देवनियां ॥ टे० ॥ घेर घेर सकलो जग खाये, घर घर सांपनियां ॥ देश देशके राजा खाये, गांव गांव भूमिनियां ॥ सरग पताल लोक सब खाये, तिहुं पुर पाटनियां ॥ जैनी जती नाथ सब खाये, शीश घुनी घुननियां ॥ स्वामी सब उपदेसित खाये, निरधन औ धननियां ॥ तीरथ भवंते भोंटू खाये, कनक औ कामनियां ॥ जोगी जंगम तपसी खाये, खाये सुनि बाधनियां ॥ शंकरके समाध छुडाये, माया मोहनियां ॥ चार बरन चारों जुग खाये, दोऊ दीन दुननियां ॥ षट् दरशन पतिबरता खाये, बीन बीन विननियां ॥ दोय एक बांच रहे हैं, राम नाम गुननियां ॥ कहैं कवीर एक सांच प्रचे, नहिं बांचे सब दुननियां ॥

शब्द १४०-बाजीगर बाजी रची, माया विस्तारा ॥ बाजीसों बाजी रमें, बाजीगर न्यारा ॥ टे० ॥ अहं बांस ममता गडो, नौ डोर पसारी। मोह ढोल बाजे सदा, नाचे नर नारी ॥ काम क्रोध हंकारका, ले डमरू बजाया। जल थलमें जिव किते, माया भरमाया ॥ दुख सुख गोता ऊचरे, माया मद पीया। ब्रह्मा विष्णु महेशको माया बस कीया ॥ चंचलते निहचल भया, अमर घर आया। कहैं कवीर बाजी तजी, बाजी गर पाया ॥

कबीरपंथी शब्दावली · पृष्ठ 829, कुल 968 में से · BharatKosha