कबीरपंथी शब्दावली
Kabirpanthi Shabdavali
स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा
स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)
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कवीरपंथी—
पराई रे ॥ नारिको यार माते मदिरासे, विके बिराने हाथाई रे ॥ जो तनका तूं गर्ब करत है, सो तन नहीं रहाई रे ॥ अजहूं चेत सुगध नर मूरख, सतगुरु होय सहाई रे ॥ अरे मतिमंद जनमके अंधा, किन ऐसी मति दहाई रे ॥ कहैं कवीर अबकी बेर चेतो, योही न जन्म गवाई रे ॥
शब्द १५४—क्या लड़ना बिराने भागोंसे ॥ टे० ॥ एक जु खाते दूध बतासे, एक गुजारे सागोंसे ॥ एक जु चढ़ते हाथी घोडा, एक लगे वाके बागोंसे ॥ एक जु पहिरे मखमल खासा, एक गुजारे आगोंसे ॥ जो लिखनी बिघने लिख दीन्हा, सो न टरे वाके भागोंसे ॥ कहैं कवीर सुनो भाइ साधो, सतगुरु चरन दीदारौसे ॥
शब्द १५५—मायाका गुलाम गेदी क्या जाने बंदगी ॥ टे० ॥ साधुसे धूमधाम, चोरनसे करे काम । धीगनसे हाथ जोरे, कपटकी बंदगी ॥ कपटके माला लीन्हे, पाखंड तिलक दीन्हे । आधारंगी धोती पहिरे, करत मिजाजगी ॥ होद न सके बंदगी, किया चाहे सिद्धगी । कहैं कवीर धिक्कार ऐसी जिदगी ॥
शब्द १५६—गाफिला साईका नाम विसारा ॥ टे० ॥ पानीके बुंदसे पिंड प्रगट भये, ऐसा सिरजनहारा ॥ नीचे शिर ऊपर पग तेरा, जब तूं किया पुकारा ॥ नौ दस मास गर्भ प्रतिपाले, वहां तोहि दिया अहारा ॥ जठर अगिनमें राख लियो है, ऐसा राखन- हारा ॥ कौल बोलके बाहिर आये, यहां भये वटपारा ॥ कहैं कवीर समुझ नर अंधा, कौलको करो संभारा ॥
शब्द १५७—दोय दिन पडाव हैदा भाई ॥ टे० ॥ हिंदू श्रवर घेरके मारे, मुसलमान काटे गार्ई ॥ घड पखानके सुरत बनाये, ता पूजन दुनिया धार्ई ॥ सुरदा गाड मसीत बनाये, तासों पीर कहे भाई ॥ कहैं कवीर सुनो भाई साधो, विन समुझे परलैं जाई ॥