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भारतकोश
कबीरपंथी शब्दावली

कबीरपंथी शब्दावली

Kabirpanthi Shabdavali

स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा

स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)

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गूढार्थचिन्तामणिकोष ।

कर्मसंचितप्रारब्धक्रियमाण
श्रोतामुक्तमुमुक्षुविषयी
मनुष्यज्ञानीविषयीपामर
अवस्था (शरीर)बालयुवाबूढ़
लिंगस्त्रीपुरुषनपुंसक
सम्बन्धसंयोगसमवायतादात्म्य
त्रिपुटीज्ञाताज्ञानज्ञेय-
ध्याताध्यानध्येय
द्रष्टादर्शनदृश्य
कर्ताक्रियाकर्म
नादविदकला
अध्यात्मअधिभूतअधिदैव
ज्ञानप्रतिबन्धकगंशयअसंभावनाविपरीतभावना
ज्ञानसाधकज्ञानवैरागउपशम
हेतुस्वरूपफल
अस्तिभांतीप्रिय
कारणवादआरंभपरिणामविवर्त
सृष्टिपारमार्थिकव्यावहारिकप्रातिभासिक
आनन्दब्रह्मानन्दविषयानन्दवासनानन्द
आत्माज्ञानात्मामहानात्माशांतात्मा
भेद आत्माकामिथ्यात्मागौणआत्मामुख्यआत्मा
अन्तःकरण दोष ,मलविश्लेषआवरण
वेधतिलकमालालंगोट

॥ चतुरविधि ॥

१ देदताब्रह्माविष्णुरुद्रओंकार
२ अवस्थाजाग्रतस्वप्नसुषुप्तितुरीया
शरीरनासूतमलकृतजवरुतलाहूत
अभिमानी (व्याप्ति)स्थूलसूक्ष्मकारणमहाकारण
” (समष्टि)विश्वतैजसप्राज्ञप्रत्यक्ष
आकाशविराट्हिरण्यगर्भईश्वरब्रह्म
चैतन्यअवस्थाघटाकाशजलाकाश,मेषाकाशमहाकाश
वेदकूटस्थजीवईश्वरब्रह्म
किताबश्रुद्वेदयजुर्वेदसामवेदअथर्ववेद
अपवेदजंबूरतौरितवायबुलकुरान
अनुबन्धआयुर्वेदधनुर्वेदगांधर्वस्थापत्य
साधनअधिकारीविषयप्रयोजनसंबन्ध
विवेकवैरागषटसंपत्तिमुमुक्षता