कबीरपंथी शब्दावली

कबीरपंथी शब्दावली
Kabirpanthi Shabdavali
स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा
स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)
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गूढार्थचिन्तामणिकोष ।
(१४७)
प्रथम बिबेक विराम पुनि, अस्मादि षट् सम्पत्ति ।
कही चतुर्षु मनुष्यता, ये सब साधनसत्ति ॥ १२ ॥
| साधन (अंतरंग) | श्रवण | मनन | निदिध्यासन | साक्षात्कार |
|---|---|---|---|---|
| भक्त | आर्त | विज्ञासु | अर्थावों | ज्ञानी |
| पुरुषार्थ | अर्थ | धर्म | काम | मोक्ष |
| आश्रम | ब्रह्मचर्य | गाहृत्स्य | वानप्रस्थ | संन्यास |
| वर्ण | ब्राह्मण | क्षत्री | वैश्य | शूद्र |
| शेष | संन्यास | मुगल | पठान | |
| मोक्षद्वारपाल | शम | संतोष | विचार | सत्संग |
मोक्ष द्वारपालकचतुर, शम संतोष विचार ।
चौथो सत्संगति घरम, महापूज्य निर्धार ॥
| संन्यास | कुटिचर | वहृदक | हंस | परमहंस |
|---|---|---|---|---|
| भूमिका | क्षिप्रा | अनागत | सूलिश्रुता | सुलीनता |
| अन्तःकरण | मन | बुद्धि | चित्त | अहंकार |
| खानि | जरायुज | अण्डज | उद्भिज्ज | स्वेदज |
| चित्तनिरोध- | अध्यात्म- | साधूसंग, | वासनात्याग, | प्राणायाम, |
| उपाय. | विद्या. | |||
| स्पर्श | शीत | उष्ण | कोमल | कठिन |
| युग | सतयुग | त्रेता | द्वापर | कलियुग |
| गरीर अवस्था | बाल | किशोर | युवा | बृद्ध |
| वैना | नाटा | मञ्जोला | लम्बा | |
| वाणी भेद | परा | पश्यन्तो | मध्यमा | वैखरी |
| शब्द भेद | काल | संधि | झाड़ | सार |
| अर्थ | शब्दार्थ | भावार्य | व्यंग्यार्थ | धन्यार्थ |
| सेना चतुरंगिणी | हाथी | रथ | पैदल | घोडा |
| नीति मार्ग | साम | दान | दण्ड | भेद |
| रिपु | काम | क्रोध | लोभ | मोह |
| मुक्ति | सालोक | सामीप्य | सारुप्य | सायुज्य |
| मनुष्य लक्षण | दया | शील | विचार | शीर्य |
| सनकादिक | सनक | सनन्दन | सन्तकुमार | सनातन |
| यार ४ | अबुबक् | उमर | उसामन | अली |
| मार्ग (हिन्दूधर्म) | कर्म | उपाशना | योग | ज्ञान |
| मार्ग (मुसलमानी) | शरीयत | तरीकत | मारफत | हकीकत |
| आधार चक्र अक्षर | च | ष | श | ह |
| स्त्री भेद | पश्चिनी | चित्रनी | शंखनी | हस्तिनी |
| पुरुष भेद | शशा | भुगा | घोडा | खर |
| उत्तम | मध्यम | लघु | निकुट्ट |