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भारतकोश
कबीरपंथी शब्दावली

कबीरपंथी शब्दावली

Kabirpanthi Shabdavali

स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा

स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)

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गूढार्थोचिततामणिकोष ।

ज्ञान परीक्षानिरालम्बनिःश्रेमनिर्वासनिकनिर्विकार
विचार परीक्षानिर्माहिनिर्वेधनिहिंसकनिर्वाण
विवेक परीक्षासावधानसर्वगीसारग्राहीसंतोषी
परम संतोष परीक्षाअयाचकअमानीअपक्षीकस्थिर
सहज परीक्षानिष्प्रपंचनिःतरंगनिलिप्तनिष्कर्म
निर्वर परीक्षासुहृदतामुबुदार्ईशीतलताईसुमति
गून्य परीक्षाशोलवंतमुबुद्धिसत्यवादोध्यानसमाधि
सन्ध्याप्रातःमध्याह्निसांज्ञमध्यरात्री
दिशापूर्वपश्चिमउत्तरदक्षिण
विष्णु आयुधपांचचक्रगदापद्म
संमप्रदाश्रीसम्प्रदाशिवसम्प्रदाब्रह्मसम्प्रदासनकादिक
आचार्यरामानुजविष्णुस्वामी,माधवानंद,निम्बाकैस्वामी
पृथ्वीके खण्डएशियाअफरिकायोरपअमेरिका

शंकराचार्य निर्मित मठ १ गोवर्धन मठ पूर्व जगन्नाथपुरीमें ॥ २ शारदा मठ पश्चिम द्वारकामें ॥

३ जोशी मठ उत्तर बद्रिकाश्रममें ॥ शृंगेरी मठ दक्षिण रामेश्वर ४ ॥

विवेकियों के जाननेयोग्य ॥ १ हेय ॥ २ ज्ञेय ३ आप्य ॥ ४ पात्र्य ॥

कबीरसाहबके ४ नाम ॥ सतमुक्त सत्यगुणमें ९ मुनिन्द्र जेतोमें ॥ कृष्णामय द्वारपरमें कबीर कलियुगमें ॥

चारगुरु ४ । १ धर्मदास सा. २ चतुर्भुज ३ वकजी ४ सहतेजी ।

॥ पदार्थ पंचविधि ॥

॥ हंस देहके तत्व आदिक वर्णन ॥

तत्व सांच धीरता, दया, शील, विचार,

ई पांचो हूं तत्व सो, संगी हंसा केर ।

साधु गुरुभत गहन मन, कल्पित सूष्टि हेर ॥

अब प्रकृति पञ्चोसको, कहौ मुनहु परसंग ।

पांच पांचते पांचई, जेहि बिधि बाढो अंग ॥

प्रकृति (साँचकी) निर्णयता, निर्विन्दता, प्रकाशता, थोरता, क्षमता ॥

प्रकृति (दैव्यकी) मिथ्या त्यागन, सत्यग्रहण, निःसंदेहता, हंता नाशन, अवलता ॥

प्रकृति (दयाकी) अद्रोहता, समता, मैत्री, अभयता, अभेदता ॥

प्रकृति (शीलकी) सहनशीलता (तितिक्षा) प्रियवचन बोलना, बुद्धिकी शांतता, परख प्रत्यक्ष प्रकट सुखमें निलेपता, (दुःख सुखमें समबुद्धि रख आनन्दमें रहना,) ॥

प्रकृति विचारकी —अस्ति नास्ति पदका विलगाना, (विवेक) यथार्थ ग्रहण व्यवहार शुद्ध सतो-गुणी बाल रखना, परख या टकसार (सर्वका पारख करना तथा बिना पारख ग्रहण नहीं करना) ॥ वेद