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भारतकोश
कबीरपंथी शब्दावली

कबीरपंथी शब्दावली

Kabirpanthi Shabdavali

स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा

स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)

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गूढार्थचिन्तामणिकोष ।

(१४९)

कुरान आदिसे लेकर सर्व महात्माओं विद्वानोंकी वाणीका यथाशक्ति अभ्यास करके बोध प्राप्त करना और उसके आशयको समझना ॥

इहि पांचोंको पंचधा, भेद प्रकृति पञ्चौस ।

हँहू हेहूकी तत्त्व प्रकृति, बूझो दिस्वाबीस ॥

अहंकारके पांच मुख—१ प्रथम मुख विषय, कर्म काण्डका प्रकाशक ॥ २ तैजस, योग, काण्डका प्रकाशक ॥ ३ प्राज्ञ उपासना कांडका प्रकाशक ४ प्रत्यक्ष अत्याज्ञान काण्डका प्रकाशक ॥ ५

॥ अद्वैत विज्ञानका प्रकाशक ॥

तन्मात्राशब्द,स्पर्श.स्पर्शःरस,गंध.
तत्त्वआकाश,वायुअग्नि,जल,पृथ्वी.
ज्ञान इन्द्रीश्रवण,त्वचा,नेत्र,जिह्वानासा.
कर्म इन्द्रीवाक्,पाणि (हस्त)पाद पायु,गुदा.उपस्थ.
वायु स्थूलव्यान,समान,उदान,प्राण,अपान.
वायु सूक्ष्मधनञ्जय,किंकरा,कूर्म,नाग,देवदत्त.
वाणी (अवस्था)शून्य,परा,पश्यन्ती,मध्यमा,वैचारी.
आकाशकी प्रकृती १शिराकाशकंठाकाश,हृदयाकाश,उदराकाशकटयाकाश
सूक्ष्मप्रकृति ,, लोभकामक्रोधमोह,भय,
वायुकी ,, फैलना,बलकरना,उठना,चलना,संकोचन.
अग्निकी ,, निद्राप्यास,भूख,क्रांति,अलस्य.
जलकी ,, लार,स्वेद,मूत्र,वीर्य,रक्त.
,,मज्जा,रक्त,मूत्र,मल.
रक्तविद्रूकफ,मेद,मूत्र.
,, पृथ्वीकी-रोम,त्वचा,नाडी,मांस,अस्थि,
,,नाडी,मांस,त्वचा,अस्थि,
शरीर-कैवल्यमहाकारणकारणसूक्ष्मस्थूल,
कोश-अन्नमय,प्राणमय,मनोमयविज्ञानमय,आनन्दमय,
भक्त-आर्त,जिज्ञासूअर्थार्थी,विज्ञान,निर्वासि,
कर्म-नित्य,नैमित्तिक,काम्य,प्रायश्चित्त,निषिद्ध,
क्लेश-अविद्या,अस्मिता,राग,द्वेष,अभिनिवेश,

दृष्टांत ५— (जगतके मिथ्यापने विषय वेदान्तानुसार) ॥ १ शक्तिविषय रजत, २ रज्जुविषय, सर्प ३ स्थाणु विषय पुष्प, ४ गगन विषय नीलता, ५ मरीचिका विषय जल ॥

नियम—शौच, संतोष. तप स्वाध्याय, ईश्वरप्रणिधान ॥

प्रलय—नित्य नैमित्तिक, दिनप्रलय, महाप्रलय, आत्यंतिकप्रलय,

भेद ५—जीव ईश्वरका भेद, जीव जीवका भेद, जीव जडका भेद, ईश जडका भेद, जड जडका भेद, भ्रम—भेद भ्रम, कर्तृत्वभ्रम, संग भ्रम, विकार भ्रम, सत्यत्वभ्रम ।