भारतकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 236, कुल 442 में से

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पृष्ठ 236

२३८ ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ रक्षिका है उसी शिवा का आराधना किया था। उसने अष्टमी में उपवास करके नवमी तिथि में मोदकों, बलियों, पिष्टों और पायसों तथा गन्ध और पुष्पों से चैत्र मास से आरम्भ करके सत्ताईस वर्ष तक प्रतिदिन शुचि होकर पुत्र की इच्छा से भली भाँति पूजा की थी। गंगा में औषधियों के प्रस्थ में मृत्तिका से परिपूर्ण मूर्ति का निर्माण करके पूजा करती थी। किसी समय तो बिना ही आहार के रह जाती थी और किसी समय व्रत धारण करने वाली होती थी। शिवा में अपने मन को विन्यस्त कर देने वाली उस मेनका देवी ने जो परम भक्ति की इच्छा रखने वाली थी, सत्ताईस वर्ष व्यतीत किए थे। सत्ताईस वर्षों के अन्त में जगत् की माता जगन्मयी परम प्रसन्न हो गई थी और प्रत्यक्ष में प्राप्त होकर बोली। देवी ने कहा-हे देवी! आपने जो प्रार्थना की थी वह अब मुझसे याचना करो। मैं तुमको सभी कुछ दे दूँगी जो भी तुम्हारे हृदय में वांछित मनोरथ होवे। इसके अनन्तर मेनका देवी ने प्रत्यक्ष में समागत हुई कालिका का दर्शन करके उसने देवी को प्रणाम किया था। इसके अनन्तर वह बोली। देवी, मैंने इस समय आपके प्रत्यक्ष स्वरूप का दर्शन प्राप्त किया है। हे शिवे! यदि आप मुझ पर सुप्रसन्न हैं तो मैं आपकी स्तुति करना चाहती हूँ। इसके अनन्तर सबको मोहित करने वाली कालिका 'माता'-यह कहकर फैली हुई बाहुओं से मेनका का उसने आलिंगन किया था। इसके उपरान्त उन मेनका देवी ने अभीष्ट वाणियों के द्वारा प्रत्यक्ष रूप में विराजमान शिवा का स्तवन किया था। मेनका ने कहा-जगत् के धामों को प्रेरणा करने वाली, लोकों को धारण करने वाली चण्डका जगत् की धात्री और सब कामों और अर्थ को धारण करने वाली को मैं प्रणाम करती हूँ। नित्य आनन्द वाली, ज्ञान से परिपूर्ण योगनिद्रा, जगत् को प्रसूत करने वाली, शूद्रा, शिवा, विधाता, शौरि और शिव के स्वरूप वाली को मैं प्रणाम करती हूँ। मायामती, महामाया, भक्तों के शोक का विनाश करने वाली, काम की वनिता, चिति, शिवा आपको मैं नमस्कार करती हूँ।