कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें२४२ ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ कुशल प्रश्न और वृत्तान्त पूछा। बोलने में महान् कुशल देवर्षि नारदजी ने जब सम्पूर्ण वृत्तान्त जान लिया तो बहुत ही हर्षित हो मेनका से बोले-यह आपकी पुत्री बहुत सुन्दर है और चन्द्रमा की आद्यकाल के ही समान वर्धित हो गई है। हे शैलराज! यह आपकी कन्या समस्त सुलक्षणों से शोभायमान है। यह सदा हर के अनुकूल भगवान् शम्भु की दयिता होने वाली है। यह तपस्विनी चित्त को अपने वश में कर लेगी और वे भगवान् शम्भु भी इसके अतिरिक्त अन्य किसी स्त्री के साथ विवाह नहीं करेंगे। इन दोनों का जैसा प्रेम है वैसा दूसरे किसी का नहीं होगा। इसके द्वारा बहुत से सुरों के कार्य होंगे। हे गिरियों में श्रेष्ठ! इसी के द्वारा भगवान् हर अर्ध नारीश्वर हैं। और इसी को चन्द्रमा की ज्योत्स्ना के ही तुल्य परम सौहार्द होगा। वह भगवान् शिव के आधे शरीर को अपने आस्पद में करेगी। तप के द्वारा भगवान् हरि के प्रसन्न होने पर यह विद्युत के समान तुम्हारी पुत्री काली हो जायेगी। इसके पीछे यह गौरी इस नाम से लोक में ख्याति को प्राप्त करेगी। शिव के अतिरिक्त अन्य किसी के भी लिये इसके प्रदान करने को आप अपना मन करने योग्य नहीं है। देवर्षि नारदजी के वचन का श्रवण कर विशारद हिमवान् ने मुनि से कहा-वे महादेवजी सङ्ग को त्याग किये हुए हैं और संयत आत्मा वाले हैं। वे तो देवों के अगोचर उपांशु तप का समाचरण कर रहे हैं। हे देवर्षि! वे ध्यान के मार्ग में समाधिस्त है और अपना मन परब्रह्म में अर्पित कर रखा है। वे उससे किस प्रकार भ्रष्ट होंगे। इसमें मुझे बड़ा भारी संशय हो रहा है। वह परब्रह्म अक्षर हैं और प्रदीप की कालिका के ही समान हैं। वे सर्वत्र अन्दर ही देखा करते हैं और बाहर के पदार्थों को कभी भी नहीं देखते हैं। हे द्विज! यह बात नित्य ही किन्नरों के मुख से सुनी जाती थी। जिनका अन्तःकरण इस प्रकार का है वे हर कैसे ध्यान भ्रष्ट किए जा सकते हैं। विशेष रूप से यह सुना गया है कि भगवान् शम्भु ने दाक्षायणी के साथ पूर्व में प्रणयन किया था। उसे मैं कहता हूँ मुझसे आप श्रवण कीजिए। शिव ने दाक्षायणी से कहा था।