कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंॐ श्रीकालिका पुराण ॐ २४९ के द्वारा हरण किया हुआ है। इस पापी से आप हमारा परित्राण करिए। हम लोग जहाँ पर जाकर स्थित रहेंगे उस स्थान को बतालइए। हे लोकनाथ! आप तो जगत् के गुरु हैं उनके द्वारा हम सब स्थान से भ्रष्ट कर दिए गए हैं। आप ही हम लोगों की गति हैं, शास्ता हैं, आप ही हमारे रक्षक पिता और प्रसूत करने वाले हैं। आप ही भुवनों के स्थापक, पालन करने वाले और कृती हैं। हे प्रजापते! जब तक हम लोग तारक नाम वाली अग्नि में भस्म होकर दग्ध न होवें अब आपको वैसा ही करना समुचित है अर्थात् वैसा ही करने के लिए आप योग्य हैं। ब्रह्मलोक में पितामह ने सुरों के इस वचन का श्रवण कर उन समस्त सुरों से कहा। ब्रह्माजी ने कहा-मेरे ही वरदान से तारक समृद्ध हुआ है। हे देवगणों! अब मेरे ही वरदान से मरण मुझ से होना युक्त नहीं होता है। आपका भी प्रतिकार होना ही चाहिए किन्तु मैं आपके द्वारा प्रेरित होकर भी भली भाँति कुछ भी प्रतिकार कर नहीं सकता हूँ। इस कारण से जैसे भी तारक स्वयं ही विनाश को प्राप्त हो वैसा आप लोग मुझसे समझ लेवें। मैं तो उपदेश ही कर देने वाला हूँ। मेरे द्वारा तारक वध नहीं होगा और वनमाली प्रभु के द्वारा भी वह वध के योग्य नहीं होगा, न हर के द्वारा तथा अन्य सुरों और मनुष्यों के द्वारा वह मारा जा सकता है। उसको तपश्चर्या करते हुए ही वरदान मैंने दे दिया था। हे सुरोत्तमो! इसका एक उपाय मैंने सोच लिया है उसे ही आप करिये। पूर्व समय में सती दाक्षायणी ने देह का त्याग कर दिया था और अपने जन्म धारण करने के लिए शैलराज की मेनका देवी के यहाँ गयी थी। गिरिराज ने उसको मेनका के उदर में समुत्पादित किया था। वह पहले साक्षात् लक्ष्मी की ही भाँति प्रसिद्ध हुई थी कि महादेव अवश्य उसका पाणिग्रहण कर लेंगे। हे सुरो! जिस प्रकार से वह शीघ्र ही उसमें अनुराग करने वाले हो जावें, उसी भाँति आप करें। उनका तेज ही आप सबका प्रतिकार करने वाला है। वे शम्भु भगवान् ऊर्ध्वरेता हैं। उनके वीर्य को वह प्रच्युत करने वाली है। उसी की ऐसी सामर्थ्य