कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)
पृष्ठ 262, कुल 442 में से
संदर्भ में पढ़ेंबतलाता हूँ। यदि आपको अच्छे लगे तो ग्रहण कीजिए। प्रजापति दक्ष की पुत्री सती परम साध्वी थी उसने पहले वृषभध्वज को अपना पति वरण किया था। यह भाग्य की ही बात थी वह पति सम्भोग से रहित थे। यह कपाली की जाया है इसी से वह सती दक्ष के द्वारा परिवर्जित कर दी गई थी। यज्ञ में भाग लेने के लिए शम्भु को भी वर्जित कर दिया गया था। उसी अपमान के होने से सती अत्यधिक शोक से आकुल हो गई थी। उस सती ने अपने परम प्रिय प्राणों का परित्याग कर दिया था, भगवान् शंकर भी त्याग कर दिए गये थे। आप तो स्त्रियों में रत्न के ही समान अत्युत्तम हैं। अपका पिता हिमवान् सभी पर्वतों का राजा है। फिर किस कारण से उस प्रकार के पति के प्राप्त करने की इस उम्र में तप के द्वारा इच्छा कर रही हैं? देवों का स्वामी, धनेश, पवन, वरुण, अग्नि अथवा कोई अन्य देव अथवा सब वैद्य अश्विनीकुमार, विद्याधर, गन्धर्व, नाग अथवा मानुष जो भी रूप और यौवन से सुसम्पन्न आपका पति होने योग्य है। जिसके द्वारा आप बहुत रत्नों के समूह से पूरित बहुमूल्य माल्य प्रवरों से संयुत धूप के चूर्णों से सुवासित, कोमल आस्तारण से समन्वित, सुमनोहर, सुविस्मृत, सुरम्य प्रासाद के मध्य में स्थित सुवर्ण के द्वारा विशेष रूप से चित्रित शय्या के बल में समासादन करके संस्थित रहने वाला ही आपका योग्य पति होगा। हे सुभगे! इस भाँति ज्ञान प्राप्त करके भी यदि आप शंकर को ही अपना बनाना चाहती है तो फिर आपको इन तपस्याओं से क्या प्रयोजन है मैं अपने आप ही उनके साथ योजित किये देता हूँ। यह सुनकर काली क्रोधित हुई। इस ब्राह्मण को उसने उत्तर के रूप में बहुत ही अल्प और तथ्य कहा था। काली ने कहा-तुम देवेश्वर हर को नहीं जानते ही बल्कि व्यर्थ ही आपने कह डाला है। जिन प्रभु के भाव को इन्द्रादि और ब्रह्मा प्रभृति सुर भी नहीं जानते हैं। उनके भाव को तुम शिशु होते हुए, हे विप्रसुत! क्या जान सकोगे। आपने जो भी नीचों के मुख से भाषित सुना है वह बहुत तुच्छ हैं।