कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)
पृष्ठ 315, कुल 442 में से
संदर्भ में पढ़ें३१८ ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ जाता है । दूसरा वैष्णवी तन्त्र बीज है जो बिन्दु इन्द्र से संयुत है । षष्ठ स्वर के उपरिचर कूर्मबीज कीर्तित किया गया है । दहन और प्लवन के आदि में दशम रन्ध्र का भेदन साधक को प्रणव मन्त्र के द्वारा भेदन करना चाहिए । वासुदेव के बीच के द्वारा आकाश में विनिधापति करे । प्रणव के सहित जो बीज है वह सब प्रतिपादित कर दिया है । आज भी समस्त देवगण क्षति को पद से स्पर्श नहीं किया करते हैं और अपने शरीर की छाया को भूतल में योजित नहीं किया करते हैं । उस दोष के मोक्ष के लिए क्षिति पर मन्त्रराज को लिखना चाहिए । प्रोक्षण करने से अथवा वीक्षण से भी भेदिनी, शुद्ध हो जाया करती है । स्थण्डिल का वीक्षण धर्म बीज के द्वारा समाचरण करना चाहिए । दान्त बल से संयुक्त और बिन्दु से समन्वित धर्म बीज कहा गया है जो धर्म, काम और अर्थ का साधन होता है । आदान, धारण तथा संस्थान, पूजन सलिल से ही पूर्ण, गन्ध और पुरुष का निक्षेप मण्डल का विन्यास और पुनः पुष्प का सश्रय अमृतीकरण यह पात्र प्रतिपति है । मनुष्य अनिरुद्ध के द्वारा आदान करके अस्त्र मन्त्र से धारण करे और पात्र में वाग्बीजराग्र से मण्डल न्यास योजित करे । आद्य बिन्दु के उत्तर अनिरुद्ध बीज होता है । वह अनिरुद्ध जब फट् अन्त में होता है तो अस्त्र मन्त्र कहा गया है । शम्भु आद्यबल प्रान्तःसपूर्व ये संहिता है । पर से पूर्व समाप्ति के अन्तवाले बिन्दु के सहित तीसरा वाग्भव बीज है यह सकल निष्फल नाम वाला है । चतुर्थ स्वर संकल्प संसृष्टि में बिन्दु से और इन्दु से वर्गादि का द्वितीय तो वाग्बीज कहा जाता है और यह कामराज नाम वाला है जो धर्म, अर्थ और काम का साधन होता है । मनोभाव का बीज कुण्डली शक्ति से संयुक्त होता है वह वासुदेव से सम्पृक्त होता है जो आद्य वाग्भव कहा गया है । एक-एक काम बीज आदि तीनों से तो त्रिपुरामद है । आद्य, तृतीय सामीन्दु बिंदुओं से समलंकृत है । यह मदन का मन्त्र है जो काम के भोग का फल प्रदान करने वाला है । ओत्, ऐत के रूप से विन्यस्त यन्त्र भास्कर के सदृश है । उसको