भारतकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 348, कुल 442 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 348

௬०२ श्रीकालिका पुराण ௬०२ ३५१ नवमी तिथि में बलियों का समर्पण करके विदा करे । दशमी तिथि में श्रवण में शावरोत्सवों के द्वारा जिस समय में दिवा के भाग में पुरुष को सम्प्रेषण करना चाहिए । सुवासिनयों के द्वारा, कुमारियों, वेश्याओं के, नर्तकियों के द्वारा शंख, तूर्यों की ध्वनियों से, मृदंग और पटहों के द्वारा ध्वज, बहुत प्रकार के वस्त्रों से, लाजा ( खील ) और पुष्पों के प्रकीर्ण के द्वारा देवी का पूजन करे । उसी समय नवमी में निशा के भाग में देवी का समुत्थान दिन में नहीं करे । निशा के भाग में जब अन्तिम चरण श्रवण को होवे उसी समय में देवी का समुत्थान नवमी में दिन के भाग में होता है । हे वत्स भैरव! इस मन्त्र के द्वारा विसर्जन करना चाहिए । हे देवि! हे चण्डेशे! आप समुत्थान कीजिए और शुभ पूजा को ग्रहण करिए । अपनी आठों शक्तियों के सहित मेरा कल्याण करिए । हे देवि! चण्डिके! अपने परम स्थान को गमन कीजिए प्रस्थान करिए । हे देवि! मेरे द्वारा जो पूजन किया है वह मुझे परिपूर्ण होवे । जल में निमज्जन करके पत्रिका वर्जित जल में भली भाँति त्याग करके पुत्र, आयु और धन की वृद्धि के लिए मेरे द्वारा जल में आपको संस्थापन करना चाहिए । यह सब लोकों की विभूति के लिए करे । महोत्सव में दुर्गा तन्त्र के द्वारा भद्रकाली, महामाया उग्रचण्डा दोनों ही देवियों का पूजन करना चाहिए । सब देवियों के पूजन में नेत्रबीज परिकीर्तित किया गया है । सब योगिनियों का और मूलमूर्ति का तथा उग्रचण्डा का मन्त्र, हे भैरव! आप पृथक् श्रवण कीजिए । अन्त में मन्त्र का उपांत आद्यद्वय नेत्रबीज है । अन्तः स्वरवह्नि से बिन्दुओं से औग्रक तन्त्र है । द्वितीया तो नेत्र द्विधा वर्जित कहा गया है । यह भद्रकाली का मन्त्र है जो धर्म, काम और अर्थ की सिद्धि के लिए है । आठ योगिनियों वाली तन्त्र में वर्णित वैष्णवी देवी का यजन किया जाया करता है । हे भैरव! पूर्व कल्प में वे शैल की पुत्री कही गई है । उग्रचण्डा आदि आठ दुर्गा तन्त्र की कीर्तित की गई है । भद्रकाली के मन्त्र के द्वारा भद्रकाली का पूजन करना चाहिए । ये आठों योगिनियों