कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें३५२ ௬ श्रीकालिका पुराण ௬
का भूति की वृद्धि के लिए अभ्यर्चन करना चाहिए । अब उन आठों के नाम बताये जाते हैं, जयन्ती, मंगला, काली, भद्रकाली, कपालिनी, दुर्गा, शिवा, क्षमा, धात्री इनका आठ दलों में पूजन करे । जिस समय में उग्रचण्डा तन्त्र के द्वारा वहाँ पर वह देवी पूजी जाती है, हे भैरव! वहाँ पर आठ योगिनियाँ जो अन्य हैं, पूजन चाहिए । अब इनके भी नाम बताये जाते हैं-कौशिकी, शिव की दूती, उमा, हेमवतीश्वरी, शाकम्भरी, दुर्गा, सातवीं महोदरी हैं । हे भैरव! सौम्य मूर्ति उमा का तन्त्र अब आप श्रवण कीजिए । समाप्ति के सहित आदि फट् जिसके अन्त में होवे और अन्त हीन होवे । एक अक्षर वाला और तीन अक्षरों से संयुत उमा का मन्त्र कहा गया है । अब ध्यान बताया जाता है-सुवर्ण के समान वर्ण वाली है, गौरी दो भुजाओं से युक्त है दाँये हाथ से नील कमल का सदा धारण किए रहती हैं । शुक्ल चामर को धारण करके गर्भ के दाहिने अंग में दाहिने हाथ का विन्यास करके संस्थित है, ऐसा ही परिचिन्तन करना चाहिए । भक्त को शम्भु के बिना भी रुद्राणी का ध्यान करना चाहिए । जो दो भुजाओं वाली है, स्वर्ण के सदृश परम शुभ अंगों से समन्वित है । पद्म तथा चामरा को धारण करने वाली है । व्याघ्र के चर्म पर स्थित पद्म पर सदा पद्मासन में संस्थित हैं । हे बेताल भैरव! इसके पूजन में आठ योगिनियों बताई गयी हैं । योगिनियों और नायिकायें भी पृथक् व्यवस्थित हैं । अब उन आठों के नाम बताये जाते हैं, जया, विजया, मातंगी, ललिता, नारायणी, सावित्री, स्वधा, स्वाहा ये आठ हैं । पहले समय में शुम्भ और निशुम्भ ये दो भाई दानव थे । ये दोनों महान् सत्व वाले थे । इनका विशाल शरीर था । ये महान् बल वाले थे, अन्धक दानव के पुत्र थे और ये दोनों मतवाले दुर्मद गजों के ही समान थे । ये दोनों सेना के साथ रहते थे और उनके वाहन भी थे, वे पाताल तल में समाश्रित थे । इसके उपरान्त उन दोनों महान् असुरों ने परम तीव्र तपश्चर्या की