कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंहै और यह नैवेद्य से देवों की तुष्टि के प्रदान करने वाला है । यह नैवेद्य ज्ञान का देने वाला एवं सभी भोग्यों से परिपूर्ण हुआ करता है । जो मनुष्य महादेवी के लिए मन के द्वारा भी नैवेद्य के समर्पित करने की इच्छा किया करता है वह मानव भक्ति से युक्त होता हुआ दीर्घ आयु वाला और सुखी हुआ करता है । जो मनुष्य सदा ही महामाया देवी की भक्ति से अनेक प्रकार के नैवेद्यों के द्वारा अर्चना करूँगा, ऐसी चिन्ता से आकुलित रहा करता है वह सभी मन की कामनाओं की प्राप्ति करके अन्त में मेरे ही लोक में प्रतिष्ठित हुआ करता है । जो पुरुष मन से भी देवी के लिए भक्तिभाव से प्रदक्षिणा देता है वह फिर यमराज की पुरी में कभी भी नरकों को नहीं देखा करता है । नमस्कार का बड़ा भारी महत्व होता है । इससे देव, मनुष्य, गन्धर्व, यक्ष, राक्षस, पन्नग प्रसन्न हुआ करते हैं । महती मति वाला पुरुष नमस्कार द्वारा चारों वर्गों का लाभ प्राप्त किया करता है । सभी जगह सबकी सिद्धि के लिए नमस्कार ही प्रशस्त किया करता है अर्थात् नमस्कार सबकी प्राप्ति के लिए परम उत्तम साधन माना है । नमस्कार से लोकों पर मानव विजय प्राप्त किया करता है और नमस्कार से आयु की भी वृद्धि होती है, नमन करने से मानव दीर्घ आयु वाला होता है और नमस्कार से अविच्छिन्न सन्तति का लाभ प्राप्त किया करता है जो कि सन्ततियों का क्रम कभी भी टूटता नहीं है । अतएव महादेवी के लिए नमस्कार करो और प्रदक्षिण होकर ही नमस्कार करो । तात्पर्य यह है कि देवों को दक्षिण भाग में स्थित करके ही नमस्कार करना चाहिए । जो निरन्तर नैवेद्य दीजिए-यह कहा करता है और बार-बार बोलता है वह मानव भी अपने समस्त मनोरथों की प्राप्ति किया करता है । इस तरह से आप दोनों को मैंने षोडश (सोलह) उपचार जो अभ्यर्चन के हुआ करते हैं बता दिए हैं । अब आप दोनों को क्या रुचिर है अर्थात् अब आप दोनों क्या पूछना पसन्द करते हैं उसी को बता दूँगा ।