भारतकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 431, कुल 442 में से

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पृष्ठ 431

ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ ४३५ क्रीं हूं ह्रीं गुह्ये कालिके हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा । यह चतुर्दशाक्षर मन्त्र सब तन्त्रों में गुप्त है । इस मन्त्र में 'गुह्ये' के स्थान पर 'दक्षिणे' पद जोड़ने से पंचदशाक्षरी दक्षिण कालिका का मन्त्र होता है । यथा- क्रीं हूं ह्रीं दक्षिणे कालिके हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा । गुह्यकाली का चतुर्दशाक्षर मन्त्र इस प्रकार है- हूं ह्रीं गुह्ये कालिके क्रीं क्रीं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा । गुह्य काली का नवाक्षर मन्त्र इस प्रकार है- क्रीं गुह्ये कालिके क्रीं स्वाहा । इसी मन्त्र में 'गुह्ये' के स्थान पर दक्षिणे शब्द जोड़ने पर दक्षिणा कालिका का दशाक्षर मन्त्र बनता है । यथा- क्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं स्वाहा । इस सब मन्त्रों की साधना में दक्षिण कालिका की पूजा-पद्धति में लिखे नियमानुसार न्यासादि करके पूजा तथा बलि करनी चाहिए । इसके बलिदान में यह विशेषता है कि पूर्व नियमानुसार बलि उत्सर्ग करके निम्नलिखित मन्त्र द्वारा बलि को निवेदित करना चाहिए । ऐं ह्रीं ऐह्येहि जगन्मातर्जगतां जननि गृहण बलिं सिद्धिं देहि देहि शत्रु क्षयं कुरु कुरु हूं हूं ह्रीं ह्रीं फट् ॐ कालिकायै नमः फट् स्वाहा । यदि गुह्यकाली के लिए बलि निवेदित करनी हो तो इस मन्त्र का उच्चारण करना चाहिए- ऐह्येहि गुह्य कालिके मम बलिं गृह् गृह् मम शत्रुन नाशय नाशय खादय स्फुर स्फुर छिन्धि छिन्धि सिद्धिं देहि हूं फट् स्वाहा । आसन का मन्त्र भी अन्य प्रकार से है । यथा- ॐ सदाशिव महाप्रेताय गुह्य कल्पासनाय नमः ।

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