भारतकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 45, कुल 442 में से

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पृष्ठ 45

४६ श्रीकालिका पुराण गये थे। हे द्विजोत्तमों ! आप लोग सभी पृथ्वी मण्डल में सृष्टि के करने वाले हैं। यही देवर्षि नारद का वाक्य था जिसके द्वारा दक्ष के पुत्र प्रेरित किए गए थे। वे आज तक भी इस पृथ्वी पर भ्रमण करते हुए वहीं वापिस हुए हैं। इसके अनन्तर मैथुन से समुत्पन्न होने वाली प्रजा का सम्पादन करने के लिए प्रजापति दक्ष ने वीरण की पुत्री के साथ विवाह किया था जो कि परम सुन्दर कन्या थी। हे द्विजसत्तमो! उसका नाम वीरणी था और अस्किनी यह भी था। उसमें सब प्रजापति का प्रथम संकल्प हुआ। हे द्विजोत्तमो! उस समय में उसमें सद्योजाता महामाया हुई। उसके जन्म होते ही प्रजापति अत्यन्त प्रसन्न हुआ था। उसको तेज से उज्जवला देखकर उस समय में उसने (दक्ष) यह वही है, ऐसा मान लिया था। जिस समय में वह समुत्पन्न हुई थी, पुष्पों की वर्षा आकाश से हुई थी और मेघों ने जल वृष्टि की थी। उस अवसर पर सभी दिशाऐं उसके जन्म धारण करने पर परम शान्त समुद्गत हो गयी थीं। आकाश में गमन करके देवगणों ने परमशुभ वाद्यों को बजाया था। हे नरोत्तमो! उस सती के समुत्पन्न होने पर शान्त अग्नियाँ भी प्रज्वलित हो गयी थीं। वीरणी के द्वारा लक्षित दक्ष प्रजापति ने उस जगदीश्वरी का दर्शन प्राप्त करके महामाया को परमार्थिक भक्ति की भावना से तोषित किया था। शिव, शांता, महामाया, योगनिद्रा, जगन्मयी दक्ष प्रजापति ने कहा था-शिवा, शान्ता, महामाया, योगनिद्रा, जगन्मयी जो विष्णुमाया कही जाती हैं उस सनातनी देवी के लिए मैं नमस्कार करता हूँ। जिसके द्वारा धाता (ब्रह्मा) इस जगत् की सृष्टि की स्थिति का सृजन करने के कार्य में नियुक्त किया था और पहले इस सृष्टि की रचना उसने की थी और भगवान् विष्णु ने उस सृष्टि की स्थिति अर्थात् हरिपालन किया था। जिसके वियोग से जगत् के पति शम्भु ने अन्त अर्थात् सृष्टि का संहार किया था। उसी देवी आपको, मैं प्रणाम करता हूँ। आप विकारों से रहित हैं, शुद्ध हैं, अप्रमेया अर्थात्