भारतकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 96, कुल 442 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 96

श्रीकालिका पुराण ९७ करने वाले हो गये थे और वे मोह से समायुक्त होकर सती के प्रति स्नेह के वशीभूत होकर स्थित हो गये। ब्रह्मा-विष्णु और शनैश्चर ने भी समस्त देवगणों ने परम प्रीति के साथ सती के पाद आदि शरीरावयवों की और ईश की पूजा की थी। देवीकूट में महादेवी महाभाग, इस नाम से गान की जाया करती हैं। जगत् के प्रभु योगनिद्रा सती के दोनों चरणों में लीन हैं। उड्डीयान में कात्यायनी और कामरूप वाली कामाख्या हैं। पूर्णगिरि व पूर्णेश्वरी है तथा जालन्धर गिरि में चण्डी इस नाम से विख्यात है। कामरूप के पूर्वान्त में देवी दिकुरवासिनी है तथा ललितकान्ता, इस नाम से योगनिद्रा का गान किया जाता हैं। जहाँ पर सती का शिर गिरा था वहाँ पर वृषभध्वज उस शिर का अवलोकन करके लम्बी श्वास लेते हुए शोक के परायण होकर उपविष्ट हो गये थे। भगवान् शंकर के उपविष्ट हो जाने पर वहाँ पर ब्रह्मा आदि देवगण दूर से ही शिव को सान्त्वना देते हुए उनके समीप में गये थे। भगवान् शंकर ने आते हुए देवों का अवलोकन करके शोक और लज्जा से समन्वित होते हुए वहीं पर शिवत्व को प्राप्त होकर लिंग के स्वरूप को प्राप्त हो गये थे। भगवान शंकर के लिंग का स्वरूप प्राप्त हो जाने पर ब्रह्मा आदि देवगणों ने उन लिंग के स्वरूप वाले जगतगुरू त्र्यम्बक भगवान् का वहाँ पर ही स्तवन किया था। देवगण ने कहा-महानदेव शिव, स्थाणु, उग्र, रुद्र, वृषभध्वज- श्मशान में निवास करने वाले, सबका अन्तःकरण, पर, भर्ग को हम भक्ति-भाव से नीललोहित शंकर को प्रणाम करते हैं जो गिरीश, वरदान देने वाले, भूत भावन और अव्यय देव हैं। अनादि, मध्य और संसार की योगविद्या वाले शम्भु के लिए नमस्कार है जो परमशिव, शान्त, ब्रह्म और लिंगमूर्ति हैं उनके लिए नमस्कार है। जटिल अर्थात् जटाजूट वाले, गिरीश, विद्या की शक्ति के धारण करने वाले, शिव, शान्त ब्रह्म और लिंग की मूर्ति वाले आपके लिए नमस्कार है। ज्ञानरूपी अमृत के अन्त तथा सम्पूर्ण शुद्ध देहान्तर, शिव, शान्त, ब्रह्म